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Tuesday, June 1, 2021

तीखी हुई पंजाब कांग्रेस में जंग, अपने स्टैंड पर कायम सिद्धू, परसों दिल्ली आएंगे CM - News18 हिंदी

नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर के बीच जारी राजनीतिक जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है. (फाइल फोटो)

नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर के बीच जारी राजनीतिक जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है. (फाइल फोटो)

पंजाब कांग्रेस में जारी कैप्टन अमरिंदर बनाम नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Siddhu) का झगड़ा और तीखा हो गया है. सोनिया गांधी द्वारा बनाई गई कमेटी से मिलने के बाद सिद्धू ने अपने तीखे तेवर बरकरार रखे और कहा कि पंजाब की सच्चाई उन्होंने बुलन्द आवाज में आलाकमान तक पहुंचा दी है.

  • Last Updated: June 1, 2021, 9:07 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली में कांग्रेस कमेटी (Congress Committee) के सामने पेश हुए नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Siddhu) के पंजाब सीएम कैप्टन अमरिंदर (Captain Amarinder Singh) के खिलाफ बागी तेवर बरकरार रहे. सूत्रों के मुताबिक नवजोत सिंह सिद्धू ने यह साफ कहा कि अगर अगले चुनाव में कैप्टन ही चेहरा होंगे तो चुनाव जीतना मुश्किल होगा. सूत्रों का यह भी दावा है कि नवजोत सिंह सिद्धू प्रदेश अध्यक्ष बनना चाहते हैं, जिसके जरिए अगले मुख्यमंत्री के लिए अपना दावा ठोक सकें. सिद्धू के साथ पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा भी कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं.

दरअसल अब पंजाब कांग्रेस में जारी कैप्टन अमरिंदर बनाम नवजोत सिंह सिद्धू का झगड़ा और तीखा हो गया है. सोनिया गांधी द्वारा बनाई गई कमेटी से मिलने के बाद सिद्धू ने अपने तीखे तेवर बरकरार रखे और कहा कि पंजाब की सच्चाई उन्होंने बुलन्द आवाज में आलाकमान तक पहुंचा दी है. नवजोत सिंह सिद्धू ने बाहर निकलकर अपने अंदाज में  कहा कि जो स्टैंड था, वही है और वही रहेगा. दरअसल सूत्रों के मुताबिक सिद्धू न सिर्फ खुद प्रदेश अध्यक्ष बनना चाहते हैं बल्कि अगला चुनाव भी कैप्टन के चेहरे पर नहीं लड़ने की बात कह रहे हैं.

विधायक परगट सिंह ने भी कैप्टन अमरिंदर सिंह पर निशाना साधा

सिद्धू के अलावा कमेटी के सामने अपनी बात रखने वालों में विधायक परगट सिंह ने भी कैप्टन अमरिंदर सिंह पर निशाना साधा. दरअसल ये नेता गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी और ड्रग्स के मामले में बादल परिवार पर कार्रवाई ना होने की बात कह रहे हैं लेकिन अंदर खाने यह लड़ाई कुर्सी की है. गुरुवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी दिल्ली आएंगे और कमेटी से मुलाकात करेंगे.

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CBSE: 12वीं बोर्ड परीक्षा होगी या नहीं? PM मोदी की बैठक में होगा फैसला - Zee News Hindi

नई दिल्ली: CBSE छात्रों के लिए बड़ी खबर आई है. कोरोना के चलते 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं. इस वर्ष कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी. CBSE 12वीं बोर्ड की परीक्षा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अध्यक्षता में हुई बैठक में ये फैसला लिया गया. सरकार के इस फैसले से सीबीएसई कक्षा 12वीं की परीक्षा देने जा रहे करीब 12 लाख छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी. ये छात्र बिना परीक्षा दिए पास हो सकेंगे.

परीक्षा दे सकते हैं छात्र

सीबीएसई का कहना है कि पिछले साल की तरह, यदि कुछ छात्र परीक्षा देने की इच्छा रखते हैं, तो स्थिति अनुकूल होने पर सीबीएसई उन्हें ऐसा विकल्प प्रदान करेगी.

PM मोदी की बैठक में लिया गया फैसला

पीएम मोदी की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में सीबीएसई के चेयरमैन के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर समेत कई बड़े मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय के आला अधिकारी मौजूद रहे.

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छात्रों के हित में फैसला: PM मोदी 

पीएम मोदी ने कहा कि सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा रद्द करने का निर्णय छात्रों के हित में लिया गया है. उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं और उस संबंध में कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, 'भारत सरकार ने 12वीं कक्षा की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है. व्यापक विचार-विमर्श के बाद, हमने यह निर्णय लिया है जो छात्रों के लिए भी अनुकूल है. ये फैसला हमारे युवाओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ भविष्य की रक्षा करेगा.'

सरकार के इस फैसले पर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने खुशी जताई. उन्होंने कहा, 'मुझे खुशी है, बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया गया है. 1.5 करोड़ बच्चे दुखी थे कि उनकी 12वीं कक्षा लगातार चलती जा रही है, वे आगे की पढ़ाई कैसे करेंगे? जिस तरह देश में कोविड मामले बढ़ रहे हैं, परीक्षा में उनकी जान को खतरा था.'

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CM केजरीवाल ने कही ये बात

12वीं की परीक्षा रद्द करने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'मुझे खुशी है कि 12वीं की परीक्षा रद्द कर दी गई है. हम सभी अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बहुत चिंतित थे. एक बड़ी राहत'

राज्यों से मांगे गए थे सुझाव 

बता दें कि 23 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में राज्य के सभी शिक्षा मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों के साथ हाई लेवल मीटिंग की गई थी. इस मीटिंग में सभी राज्यों से बोर्ड परीक्षा के आयोजन को लेकर सुझाव मांगे गए थे. बोर्ड परीक्षा रद्द कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है. 31 मई को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से 2 दिन का समय मांगा था.

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मेहुल चोकसी के भाई ने डोमिनिका में विपक्षी सांसद को दी घूस, मुद्दा दबाने के बदले चुनाव में मदद करने का वादा: रिपोर्ट - Navbharat Times

भास्कर एक्सक्लूसिव: अब ममता देंगी अलपन को भेजे गए केंद्र के नोटिस का जवाब, लंबी चिट्ठी लिखने की तैयारी - Dainik Bhaskar

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नई दिल्ली5 घंटे पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी

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केंद्र और बंगाल के बीच विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। कभी ममता बनर्जी भारी पड़ती हैं तो कभी केंद्र। पर अलपन बंधोपाध्याय को मुख्य सलाहकार बनाकर कर ममता दीदी ने मास्टर स्ट्रोक खेल दिया है। और जैसा कि उम्मीद थी, केंद्र चुप नहीं बैठेगा। केंद्र ने बंदोपाध्याय को नोटिस भेजा है कि वे इस बात का जवाब दें कि आखिर क्यों आप पीएम की बैठक में शामिल नहीं हुए? 3 दिनों में जवाब दें। केंद्र के इस नोटिस में बैठक में शामिल होने पर आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत एक्शन की बात भी कही गई है।

उधर, ममता बनर्जी अलपन को मिले इस नोटिस का जवाब देने की तैयारी कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी केंद्र को दो-चार लाइनों में नहीं, बल्कि एक लंबी चिट्ठी लिखकर जवाब देने की तैयारी कर रही हैं। इसमें अलपन के मीटिंग में न रहने की वजह बताने के साथ वे केंद्र पर राज्य से बातचीत न करने का आरोप भी मढ़ने वाली हैं।

कुछ ऐसा होगा ममता के खत का मजमून

  • दरअसल, अलपन बंधोपाध्याय इमोशनल ट्रॉमा से गुजर रहे हैं। उनके भाई की मौत 16 मई को हुई है। उन पर किसी भी तरह का दबाव डालना इंसानियत नहीं कहा जाएगा।
  • अलपन का रिटायरमेंट डे 31 मई था। लिहाजा काम का आखिरी दिन होने की वजह से कई जिम्मेदारियां ट्रांसफर करनी थीं। ऐसे में जब पूरा देश कोरोना से जूझ रहा है तो राज्य भी इससे अलग नहीं है। महामारी के दौरान अलपन बंधोपाध्याय ने अहम भूमिका निभाई। उनके पास कई जिम्मेदारियां थीं, जिनका ट्रांसफर किया जाना जरूरी था।
  • केंद्र को चाहिए था कि वह राज्य से भी बातचीत करे। केंद्र ने केवल मुख्य सचिव से ही बात की। ऐसी आपदा में केंद्र को मुख्यमंत्री कार्यालय से भी बातचीत करनी चाहिए थी। अगर हमसे संवाद हुआ होता तो शायद हम बता पाते कि अलपन 31 मई को रिटायर होने वाले हैं। यह उनकी जॉब का अंतिम दिन होगा। ऐसे में उनका बैठक में रहना शायद मुमकिन न हो। हम कुछ और रास्ते तलाश सकते थे।

केंद्र के संभावित सवाल पर भी जवाब तैयार है
बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस जवाब पर केंद्र भी सवाल कर सकता है। केंद्र सरकार पूछ सकती है कि अलपन का कार्यकाल तो 3 महीने के लिए बढ़ा दिया गया था, फिर यह उनके काम का यह अंतिम दिन कैसे हुआ? ममता बनर्जी ने ने इसका जवाब भी तैयार कर लिया है। ऐसे में ममता कह सकती हैं कि यह राज्य का इंटरनल मैटर है कि वह किसे रिटायर करे और किसका कार्यकाल बढ़ाए? 31 मई के बाद वाले दिन से अलपन का एक्सटेंशन पीरियड शुरू होता तो 31 मई ही उनके काम का अंतिम दिन हुआ। केंद्र को भी यही मानना चाहिए।

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CBSE 12th Exam 2021 : सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षाएं रद्द, छात्र बाद में दे सकेंगे Exam - Hindustan

CBSE 12th Exam 2021 : सीबीएसई 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है। यह फैसला पीएम मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार शाम एक अहम बैठक में लिया गया। कोरोना महामारी के अनिश्चितता भरे माहौल और विभिन्न हितधारकों की राय लेने के बाद फैसला किया गया कि इस साल कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित नहीं की जाएंगी।

सीबीएसई अब 12वीं के छात्रों के रिजल्ट तैयार करने के लिए कदम उठाएगा। यह एक पारदर्शी, वैकल्पिक प्रक्रिया के जरिए एक समय-सीमा के भीतर होगा।

सरकार ने बताया कि पिछले साल की तरह, यदि कुछ छात्र परीक्षा देने की इच्छा रखते हैं, तो स्थिति अनुकूल होने पर सीबीएसई द्वारा उन्हें ऐसा विकल्प प्रदान किया जाएगा।

इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "सरकार ने सीबीएसई कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है। व्यापक विचार विमर्श के बाद हमने छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया है। इससे न सिर्फ छात्रों को सुरक्षा मिलेगी बल्कि उनका भविष्य भी उज्ज्वल रहेगा।"

उन्होंने कहा कि कोरोना (COVID-19) ने अकेडमिक कैलेंडर को प्रभावित किया है और बोर्ड परीक्षाओं का मामला छात्रों, शिक्षकों और पैरेंट्स भारी चिंता पैदा कर रहा था जिसे खत्म किया जाना जरूरी था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी की स्थिति पूरे देश में एक बहुआयामी और व्यापक स्थिति है। हालांकि कोरोना के मामलों के नंबर लगातार कम हो रहे हैं। कुछ राज्य इसे प्रभावी ढंग से माइक्रो-कैंटेनमेंट हैंडल कर रहे हैं तो कुछ राज्य अभी भी लॉकडाउन का विकल्प ले रहे हैं। छात्र, शिक्षक और अभिभावक प्राकृतिक रूप से अपनी सेहत को लेकर चिंतित थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों पर ऐसी स्थिति में परीक्षाएं देने दबाव डालना नहीं होना चाहिए।

सरकार के इस फैसले से सीबीएसई कक्षा 12 की परीक्षा देने जा रहे करीब 12 लाख और आईसीएससीई के 4 लाख छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी।  यानी इस साल 12वीं के करीब 16 लाख छात्र बिना परीक्षा दिए पास हो सकेंगे।

12वीं की बोर्ड परीक्षाएं रद्द किए जाने पर खुशी जताते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मुझे खुशी है कि 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। हम अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंतित थे। यह बहुत बड़ी राहत है। वहीं, दिल्ली के डिप्टी सीएम और राष्ट्रीय राजधानी के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, ''हम फैसले का स्वागत करते हैं। यह फैसला छात्रों और टीचरों के हित में है। हमने भी यही मांग की थी। पहले की परफॉर्मेंस पर स्टूडेंट्स को मार्क्स मिलने चाहिए।''

बैठक में उन्हें तमाम राज्यों और हितधारकों से मिले सुझावों एवं व्यापक विचार विमर्श से निकल रहे विभिन्न विकल्पों के बारे में बताया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई मीटिंग में केंद्रीय मंत्री अमित शाह, प्रकाश जावड़ेकर, पीयूष गोयल, धर्मेन्द्र प्रधान, निर्मला सीतारमण मौजूद थे। इसके अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल हुए।

इससे पहले 23 मई को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई हाईलेवल मीटिंग के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा था कि 12वीं बोर्ड परीक्षाओं पर एक जून को या इससे पहले अंतिम फैसला ले लिया जाएगा। इसके अलावा केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में भी कहा कि दो दिनों के भीतर 12वीं बोर्ड परीक्षाओं पर फैसला ले लिया जाएगा। 

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Weather Update: उत्तर भारत में बदला मौसम का मिजाज, इन राज्यों में गरज के साथ बारिश की चेतावनी - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)

नई दिल्ली, एजेंसी। उत्तर भारत के अधिकतर राज्यों में मौसम का मिजाज बदला है। दिल्ली-एनसीआर में हुई बारिश से उमस भरी गर्मी से राहत मिली है। मौसम विभाग के मुताबिक आज भी दिल्ली में गरज के साथ बारिश  का अनुमान जताया है। मौसम विभाग के अनुसार बिहार के ऊपर चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। जबकि उत्तर पूर्व मध्य प्रदेश तक एक निम्न स्तर की ट्रफ रेखा बनी हुई है। इसके कारण उत्‍तर प्रदेश के कई इलाकों में तेज हवाएं चलने और बारिश होने का अनुमान है।

वहीं स्काईमेट वेदर के मुताबिक अगले 24 घंटों के दौरान, पूर्वोत्तर भारत, सिक्किम, मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों, केरल और तटीय कर्नाटक में हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक दो स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मराठवाड़ा और विदर्भ के कुछ हिस्सों में एक या दो तेज बारिश के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज और धूल भरी आंधी चल सकती है। आंतरिक तमिलनाडु, आंतरिक कर्नाटक, पश्चिमी हिमालय और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मध्य प्रदेश में हल्की बारिश हो सकती है।

यूपी बिहार सहित इन राज्यों में बारिश की संभावना

इसके अलावा उत्तर प्रदेश बिहार, मध्य महाराष्ट्र, तटीय आंध्र प्रदेश, उत्तरी कर्नाटक, केरल, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगिट में भी अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली चमक और धूल भरी आंधी आने के आसार है, साथ ही बारिश भी हो सकती है। असम मेघालय, ओडिशा, गोवा, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुर, तमिलनाडु व पुडुचेरी में भारी से बहुत भारी बर्षा की संभावना है।

हिमाचल में बारिश-तूफान की संभावना

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने प्रदेश के की इलाकों में तीन दिन और बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। मैदानी और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में 5 जून तक मौसम खराब रहेगा। पांच जून तक पूरे प्रदेश में बारिश और बर्फबारी के आसार हैं। जबकि 10 जून के बाद से प्रदेश में प्री-मॉनसून की बौछारें पड़ेंगी औक 25 जून तक हिमाचल में मॉनसून दस्तक दे सकता है।

उत्तराखंड में भारी बारिश, येलो अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। देहरादून, बागेश्वर, नैनीताल और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में 2 जून को भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना है।

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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, निरर्थक मामले निपटाने में बर्बाद हो रहा कोर्ट का महत्वपूर्ण समय - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)

नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि उसके समक्ष बड़ी संख्या में फालतू मामले दाखिल किए जा रहे हैं जिनकी वजह से शीर्ष अदालत का बहुत ज्यादा समय बर्बाद हो जाता है। ये मामले कोर्ट को निष्कि्रय बना रहे हैं। जिस समय में कोर्ट राष्ट्रीय महत्व के किसी मामले का निपटारा कर सकती है उस समय में उसे किसी निरर्थक मामलों को समझने में लगाना पड़ता है।

कोर्ट ने कहा कि फालतू याचिकाओं के कारण से राष्ट्रीय महत्व के मुकदमों की सुनवाई और निपटारे में अनावश्यक विलंब होता है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की विशेष पीठ ने यह टिप्पणी उपभोक्ता विवाद से संबंधित एक अर्जी पर सुनवाई के दौरान की।

पीठ ने कहा कि इस मामले का निपटारा हो चुका है। अंतिम आदेश भी पारित किया जा चुका है। लेकिन याचिकाकर्ता फिर से एक छोटे से मुद्दे पर एक आवेदन के साथ आ गए हैं।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हम पहले से निपटाए गए मामले में एक और आदेश पारित नहीं कर सकते हैं। हमें आपकी बात नहीं सुननी चाहिए। जजों को दिन की शुरुआत होते ही इन फाइलों को देखने के लिए अपना महत्वपूर्ण समय देना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि जजों के पास राष्ट्रीय महत्व के उन मामलों को देखने का समय होना चाहिए, जो वाकई गंभीर मामले हैं।

उन्होंने कहा कि मंगलवार को जब हम सूचीबद्ध मामलों को देख रहे थे, तो हमने पाया कि 95 फीसद मामले निरर्थक हैं। सोमवार को हमें कोविड प्रबंधन पर स्वत: संज्ञान मामले में आदेश को अंतिम रूप देना था, जो राष्ट्रीय महत्व का मामला है, लेकिन इसे अपलोड नहीं किया जा सका क्योंकि मेरा समय मंगलवार के लिए सूचीबद्ध मामलों को देखने में निकल गया। पीठ ने कहा कि फालतू मामलों से अदालतों की कार्यक्षमता घट रही है। उनका महत्वपूर्ण व कीमती समय बर्बाद हो जाता है। अदालतें अपने समय का सदुपयोग गंभीर और राष्ट्रीय महत्व के मामलों में कर सकती हैं।

पीठ ने वकील की एक नहीं सुनी

मंगलवार को जिस याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने यह सख्त टिप्पणी की उसमें याचिकाकर्ता के वकील ने जब कहा कि वे कोर्ट का ज्यादा वक्त नहीं लेंगे तो पीठ ने कहा कि हम आपको सुनेंगे ही नहीं। पीठ ने वकील से कहा कि उन्हें कोर्ट की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। अगर हमने इस मामले में सुनवाई की तो लोगों में यही संदेश जाएगा कि जजों के पास बहुत समय होता है।

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'हां, ये सही है लेकिन क्या मुल्क में यही चलता रहेगा...', ASI रिपोर्ट पर बोले प्रोफेसर इरफान हबीब - Aaj Tak

ज्ञानवापी परिसर की ASI सर्वे रिपोर्ट को लेकर हिंदू पक्ष ने कई दावे किए हैं. गुरुवार को वकील विष्णु शंकर जैन ने रिपोर्ट सार्वजनिक की. उन्हों...