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Wednesday, January 24, 2024

मोदी से हटकर हिमंत बिस्वा सरमा से भिड़े राहुल गांधी, अपना ही नुकसान कर लिया - Aaj Tak

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा की शुरुआत ऐसे समय में कि जब राम मंदिर समारोह शुरू हो रहा था. राहुल गांधी का शायद इरादा ही था कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह से बीजेपी को होने वाले राजनीतिक फायदे को रोका जा सके. जाहिर है उनके टार्गेट पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे. मणिपुर से शुरुआत तो नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर हमलों से शुरू हुई पर असम तक आते-आते राहुल गांधी की न्याय यात्रा राहुल बनाम मोदी की जगह राहुल बनाम हिमंत बिस्वा सरमा होती जा रही है. ऐसा कैसे हो गया ? क्या राहुल गांधी बीजेपी के इस क्षत्रप के राजनीतिक चाल में फंस गए या जानबूझकर राहुल असम के मुख्यमंत्री को टार्गेट कर रहे हैं. क्या ऐसा नहीं लगता है कि राहुल गांधी की न्याय यात्रा असम में ही डिरेल हो गई है. बंगाल-बिहार और यूपी में तो और मुश्किलें सामने आने वाली हैं.

1-क्या राहुल गांधी ने हिमंत को टार्गेट करके गलती कर दी

19 जनवरी को असम पहुंचते ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर बड़ा हमला बोल दिया.राहुल गांधी ने कहा कि हिमंत सरमा देश के सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री हैं और बीजेपी के अन्य मुख्यमंत्रियों को भ्रष्टाचार करना सिखाते हैं.उन्होंने यह भी कि मुझे लगता है कि देश की सबसे भ्रष्ट सरकार असम में है. आप जानते हैं यहां क्या हो रहा है. हम असम के मामलों को यात्रा के दौरान उठाएंगे. भ्रष्टाचार वाले बयान के कुछ घंटों बाद असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने उनके बयान पर ताबड़तोड़ पलटवार करके रुख को ही मोड़ दिया.

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असम सीएम जैसा अपने तेवरों के लिए जाने जाते हैं उसी अंदाज में उन्होंने बिना देर किए राहुल गांधी के हमलों का जवाब दे दिया था.राहुल गांधी के परिवार को देश में सबसे भ्रष्ट करार दिया. उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि इस देश में सबसे भ्रष्ट अगर कोई है तो वो है गांधी परिवार है. वे सिर्फ भ्रष्ट ही नहीं है बल्कि डुप्लिकेट भी हैं. उनके परिवार के नाम में गांधी है भी नहीं लेकिन फिर भी वे गलत नाम अपनाए हैं. अगर कोई फर्जी लाइसेंस रखता है तो उसे मैं पकड़ सकता हूं पर लेकिन उनका क्या जिन्होंने गलत टाइटल रखा हुआ है.

राहुल गांधी के हमले के बाद हिमंत लगातार राहुल की यात्रा को टार्गेट किए हुए हैं.अब झगड़ा इस हद तक पहुंच चुका है कि हिमंत ने असम डीजीपी को राहुल गांधी के खिलाफ गुवाहाटी शहर में जबरन घुसने और अपने कार्यकर्ताओं को हिंसा के लिए भड़काने का आरोप लगाने पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है.

राहुल गांधी की गलती यह है कि उन्होंने हिमंत को टार्गेट करके बर्र के छत्ते में हाथ डाल दिया. अब मामला राहुल बनाम मोदी के बजाय राहुल बनाम हिमंत बिस्व सरमा का हो गया. क्या ऐसा नहीं लग रहा है कि भारतीय जनता पार्टी यही चाहती रही हो . 

2-राहुल समझ रहे हैं कि हिमंत उनके अंगुलियों पर खेल रहे हैं

राहुल गांधी ने असम में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा जो कुछ भी कर रहे हैं उससे हमारी यात्रा को फायदा हो रहा है. राहुल ने कहा कि जो प्रचार हमें नहीं मिलता,असम के सीएम के चलते हमें मिल गया है. हिमंत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हमारी मदद कर रहे हैं. ताबड़तोड़ दोनों तरफ बयानों के आने के बाद असम में मुख्य मुद्दा भारत जोड़ो न्याय यात्रा बन गया है. यह राहुल गांधी खुद कह रहे हैं. राहुल फिर हिमंत को टार्गेट करते हैं . वो कहते हैं कि हिमंता असम नहीं चला सकते.बीजेपी कार्यकर्ता भी हिमंता को पसंद नहीं करते. राहुल समझ रहे हैं कि उनकी यात्रा को असम में चर्चा मिल गई और वो अपने इरादे में सफल हो गए. पर राहुल की यात्रा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ नहीं थी . उन्हें तो नरेंद्र मोदी को टार्गेट करना था. राहुल यह समझ नहीं पा रहे हैं कि हिमंत को टार्गेट करके वो अपनी यात्रा को डिरेल कर रहे हैं.

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3-क्या हिमंत के चक्रव्यूह में फंस गए राहुल गांधी

राहुल गांधी की यात्रा के असम पहुंचने से पहले ही जिस तरह के तेवर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने दिखाए थे उससे साफ लगता है कि उन्होंने राहुल को ट्रैप करने की प्लानिंग कर रखी थी. हिमंत बार-बार धमकी दे रहे थे कि वो गुवाहाटी शहर में प्रवेश करेंगे तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी. उन्होंने यहां तक कहा था कि मामला अभी दर्ज होगा गिरफ्तारी चुनाव बाद होगी. सरमा ने कहा था कि राहुल गांधी की यह न्याय यात्रा नहीं मियां यात्रा है. जहां जहां मुसलमान हैं, वहीं पर उनकी यात्रा का रूट रखा गया है.

आखिरकार हुआ वही. राहुल गांधी के सामने गुवाहाटी में मंगलवार को पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई. पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया. इस बीच सरमा ने डीजीपी को राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि हिंसा असमिया संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं. हम एक शांतिपूर्ण राज्य हैं.

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा, 'ये असमिया संस्कृति का हिस्सा नहीं है. हम एक शांतिपूर्ण राज्य हैं. ऐसी 'नक्सली रणनीति' हमारी संस्कृति से पूरी तरह अलग है. मैंने असम पुलिस के डीजीपी को भीड़ को उकसाने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज करने और उनके हैंडल पर पोस्ट किए गए फुटेज को सबूत के रूप में उपयोग करने का निर्देश दिया है. राहुल गांधी के अनियंत्रित व्यवहार और सहमत दिशा निर्देशों के उल्लंघन के परिणामस्वरूप अब गुवाहाटी में बड़े पैमाने पर ट्रैफिक जाम हो गया है.
हिमंत ने जो कहा वो किया. हिमंत का एक्शन बताता है कि राहुल गांधी की यात्रा को असम में इतना उलझा देना है कि मामला राहुल बनाम मोदी की जगह राहुल बनाम हिमंत हो जाए. 22 जनवरी को जब राहुल गांधी के एक मंदिर में प्रवेश करना चाहते थे उन्हें रोक दिया गया. राहुल गांधी सड़क पर धरने पर बैठ गए. एक तरफ पूरा देश राम मंदिर प्राण प्रतिष्‍ठा देखने में व्यस्त था तो दूसरी ओर राहुल गांधी को एक मंदिर में जाने के लिए जिद करते हुए देख रहे थे. सोशल मीडिया पर लोग कह रहे थे कि राम मंदिर का विरोध करने वाली पार्टी का नेता एक मंदिर में जाने का दिखावा कर रहा है. हिमंत और उनकी पार्टी यही चाहती थी और राहुल गांधी वही कर रहे थे.

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Monday, January 22, 2024

राम मंदिर में भीड़ से घिरे अमिताभ बच्चन के पास पहुंचे PM मोदी, पहले हाथ जोड़े फिर - ABP न्यूज़

PM Modi Amitabh Bachchan Viral Video: अयोध्या में आज रामलला के प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम पूरे विधी विधान के साथ संपन्न हुआ. इस समारोह में शामिल होने के लिए बॉलीवुड के कई दिग्गज एक्टर्स को न्योता भेजा गया था. इन्हें स्टार्स में सबसे बड़ा नाम अमिताभ बच्चन का था. अमिताभ बच्चन अपने एक्टर बेटे अभिषेक बच्चन के साथ अयोध्या पहुंचे थे. इस दौरान बिग बी पारंपरिक परिधान में नज़र आए. प्राण प्रतिष्ठा के संपन्न होने के बाद अमिताभ बच्चन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. 

भीड़ से घिरे अमिताभ बच्चन के पास पहुंचे पीएम मोदी 

वायरल वीडियो में पीएम मोदी प्राण प्रतिष्ठा के बाद राम मंदिर आए सभी मेहमानों का अभिवादन कर रहे थे. इसी दौरान पीएम मोदी भीड़ से घिरे अमिताभ बच्चन के पास पहुंचे. पीएम मोदी ने पहले तो अमिताभ बच्चन का अभिवादन किया और फिर उनसे बात की. इस दौरान दोनों ही एक दूसरे से मुसकान के साथ हाथ जोड़ते नज़र आए.

पीएम मोदी ने अमिताभ बच्चन से क्या पूछा?

दरअसल वायरल वीडियो में दिख रहा है कि पीएम मोदी अमिताभ बच्चन से उनके हाथ की सर्जरी के बारे में पूछ रहे हैं. इसके बाद अमिताभ बच्चन अपने दाएं हाथ की ओर इशारा करते हैं. अमिताभ बच्चन ने हाल ही में खुलासा किया था कि उनके हाथ की सर्जरी हुई है. बिग बी पिछले साल टीवी के पॉपुलर क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में हाथ पर बैंडेज लगाए दिखे थे.

कार्यक्रम में ये हस्तियां हुईं शामिल

बता दें कि अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन के अलावा अभिनेता रजनीकांत, रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, चिरंजीवी, कैटरीना कैफ, विक्की कौशल, निर्देशक रोहित शेट्टी, आयुष्मान खुराना, सिंगर शंकर महादेवन, सोनू निगम, निर्देशक मधुर भंडारकर और अभिनेत्री माधुरी दीक्षित नेने, उनके पति श्रीराम नेने समेत कई हस्तियां राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे.

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अयोध्या में फोटो और वीडियो के लिए भीड़ में घिरे ऐक्टर्स… जवानों ने खींचकर निकाला

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Sunday, January 21, 2024

बिलकिस बानो केस: सभी 11 दोषियों ने गोधरा की उप जेल में देर रात किया सरेंडर - Aaj Tak

बिलकिस बानो केस के सभी 11 आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रविवार देर रात पुलिस की कड़ी निगरानी में गोधरा उप जेल में सरेंडर कर दिया. बहुचर्चित बिलकिस बानो केस में आरोपियों की गुजरात सरकार द्वारा की गई सजा माफी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद उन्हें 21 जनवरी तक जेल में पेश होने का आदेश दिया गया था. सभी 11 दोषी रात 11:30 बजे दो निजी वाहनों में सिंगवड रंधिकपुर से गोधरा उप जेल में पहुंचे और सरेंडर किया.

स्थानीय अपराध शाखा निरीक्षक एनएल देसाई ने पीटीआई को बताया, "सभी 11 दोषियों ने रविवार देर रात जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर कर दिया है." 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी को हाई-प्रोफाइल मामले में 11 दोषियों को गुजरात सरकार द्वारा दी गई छूट को रद्द कर दिया था, जबकि राज्य को एक आरोपी के साथ मिलीभगत होने और अपने विवेक का दुरुपयोग करने के लिए फटकार लगाई थी. कोर्ट ने 2022 में स्वतंत्रता दिवस पर समय से पहले रिहा किए गए दोषियों को दो सप्ताह के भीतर जेल वापस जाने का आदेश दिया था. 

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वहीं शीर्ष अदालत ने कुछ दिन पहले दोषियों को सरेंडर के लिए और समय देने की याचिका खारिज कर दी थी और उन्हें रविवार तक हर हाल में सरेंडर करने को कहा था. 11 दोषियों में बाकाभाई वोहानिया, बिपिन चंद्र जोशी, केसरभाई वोहानिया, गोविंद नाई, जसवन्त नाई, मितेश भट्ट, प्रदीप मोरधिया, राधेश्याम शाह, राजूभाई सोनी, रमेश चंदना और शैलेश भट्ट शामिल हैं. 

गौरतलब है कि बिलकिस बानो 21 साल की थीं और पांच महीने की गर्भवती थीं, जब फरवरी 2002 में गोधरा ट्रेन जलाने की घटना के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगों की दहशत से बचने की कोशिश करते समय उनके साथ गैंगरेप किया गया था. इतना ही नहीं, आरोपियों ने उनके परिवार के सदस्यों को मार डाला था. इनमें बिलकिस की तीन साल की बेटी भी शामिल है.

(पीटीआई के इनपुट के साथ)

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बिलकिस बानो केस: सभी 11 दोषियों ने गोधरा की उप जेल में देर रात किया सरेंडर - Aaj Tak

बिलकिस बानो केस के सभी 11 आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रविवार देर रात पुलिस की कड़ी निगरानी में गोधरा उप जेल में सरेंडर कर दिया. बहुचर्चित बिलकिस बानो केस में आरोपियों की गुजरात सरकार द्वारा की गई सजा माफी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद उन्हें 21 जनवरी तक जेल में पेश होने का आदेश दिया गया था. सभी 11 दोषी रात 11:30 बजे दो निजी वाहनों में सिंगवड रंधिकपुर से गोधरा उप जेल में पहुंचे और सरेंडर किया.

स्थानीय अपराध शाखा निरीक्षक एनएल देसाई ने पीटीआई को बताया, "सभी 11 दोषियों ने रविवार देर रात जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर कर दिया है." 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी को हाई-प्रोफाइल मामले में 11 दोषियों को गुजरात सरकार द्वारा दी गई छूट को रद्द कर दिया था, जबकि राज्य को एक आरोपी के साथ मिलीभगत होने और अपने विवेक का दुरुपयोग करने के लिए फटकार लगाई थी. कोर्ट ने 2022 में स्वतंत्रता दिवस पर समय से पहले रिहा किए गए दोषियों को दो सप्ताह के भीतर जेल वापस जाने का आदेश दिया था. 

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वहीं शीर्ष अदालत ने कुछ दिन पहले दोषियों को सरेंडर के लिए और समय देने की याचिका खारिज कर दी थी और उन्हें रविवार तक हर हाल में सरेंडर करने को कहा था. 11 दोषियों में बाकाभाई वोहानिया, बिपिन चंद्र जोशी, केसरभाई वोहानिया, गोविंद नाई, जसवन्त नाई, मितेश भट्ट, प्रदीप मोरधिया, राधेश्याम शाह, राजूभाई सोनी, रमेश चंदना और शैलेश भट्ट शामिल हैं. 

गौरतलब है कि बिलकिस बानो 21 साल की थीं और पांच महीने की गर्भवती थीं, जब फरवरी 2002 में गोधरा ट्रेन जलाने की घटना के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगों की दहशत से बचने की कोशिश करते समय उनके साथ गैंगरेप किया गया था. इतना ही नहीं, आरोपियों ने उनके परिवार के सदस्यों को मार डाला था. इनमें बिलकिस की तीन साल की बेटी भी शामिल है.

(पीटीआई के इनपुट के साथ)

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Friday, January 19, 2024

कांग्रेस एक देश, एक चुनाव का विरोध करती है: खड़गे बोले- इसके लिए संविधान की मूल संरचना को बदलना होगा - Dainik Bhaskar

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नई दिल्ली7 घंटे पहले

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक साथ चुनाव करवाने को लेकर बनी कमेटी को 17 जनवरी को लेटर लिखा था, लेकिन कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसकी जानकारी 19 जनवरी को दी। - Dainik Bhaskar

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक साथ चुनाव करवाने को लेकर बनी कमेटी को 17 जनवरी को लेटर लिखा था, लेकिन कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसकी जानकारी 19 जनवरी को दी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को वन नेशन, वन इलेक्शन को लकर बनी हाई लेवल कमेटी के सेक्रेटरी को लेटर लिखा है। इसमें उन्होंने कहा कि देश में एकसाथ चुनाव करवाने का कांग्रेस विरोध करती है।

खड़गे ने कहा कि जिस देश में संसदीय शासन प्रणाली अपनाई गई हो, वहां एकसाथ चुनाव की अवधारणा के लिए कोई जगह नहीं है। यह संविधान की मूल संरचना के विरुद्ध है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो संविधान की मूल संरचना में बदलाव करने पड़ेंगे।

दरअसल, देश में एकसाथ चुनाव कराने को लेकर पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द के नेतृत्व में एक समिति बनाई गई है। इसमें 8 मेबंर हैं। 18 अक्टूबर 2023 को कमेटी ने कांग्रेस से इस मामले में सुझाव मांगे थे।

17 जनवरी को खड़गे ने कमेटी के सेक्रेटरी नितिन चंद्र को 4 पन्ने का लेटर लिखकर जवाब दिया है। इसमें 17 पॉइंट्स हैं। कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि एकसाथ चुनाव करवाने के विचार को छोड़ दिया जाए और हाई पावर कमेटी को भंग कर दिया जाए।

23 सितंबर 2023 की ये तस्वीर वन नेशन, वन इलेक्शन की बैठक की है।

23 सितंबर 2023 की ये तस्वीर वन नेशन, वन इलेक्शन की बैठक की है।

खड़गे के लेटर के 6 अहम पॉइंट्स …

  1. वन नेशन, वन इलेक्शन को लेकर जो हाईलेवल कमेटी बनाई गई है, वह पक्षपाती है। क्योंकि इसमें विपक्षी दलों का कोई प्रतिनिधि नहीं है।
  2. एक साथ चुनाव को लेकर सरकार ने पहले ही अपने विचार व्यक्त कर दिए हैं। वह देश में ऐसे ही चुनाव करवाना चाहती है। ऐसे में इसको लेकर कमेटी बनाना सिर्फ दिखावा है।
  3. कमेटी के हेड पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद हैं। साल 2018 में संसद में उन्होंने कहा था कि बार-बार चुनाव करवाने से विकास के काम रुक जाते हैं। कांग्रेस बताना चाहती है कि विकास इसलिए नहीं हो पा रहा है, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी काम करने की बजाय चुनाव ही करते रहते हैं।
  4. कमेटी का तर्क है कि अगर एकसाथ चुनाव होते हैं तो खर्चा बचेगा। यह बिल्कुल बेबुनियाद है। 2014 के लोकसभा इलेक्शन में 3,870 करोड़ रुपए का खर्च हुआ था, जिसके बारे में कमेटी का दावा है कि यह काफी ज्यादा है। इससे ठीक उल्ट भाजपा को 2016-2022 के दौरान 10,122 करोड़ रुपए का चंदा मिला, जिसमें से 5271.97 करोड़ रुपए के बेनामी बॉन्ड हैं। अगर कमेटी और सरकार सच में चुनाव के खर्च पर गंभीर है तो इलेक्टोरल बॉन्ड की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएं।
  5. यह तर्क भी बेबुनियाद है कि आचार संहिता लगने से विकास के कामों पर असर पड़ता है। चुनाव के दौरान पहले से मौजूद योजनाएं और परियोजनाएं जारी रहती हैं।
  6. एकसाथ चुनाव कराने के लिए कई विधान सभाओं को भंग करने की आवश्यकता होगी, जो अभी भी अपने कार्यकाल के आधे (या उससे कम) समय पर हैं। यह उन राज्यों के मतदाताओं के साथ धोखा होगा।

सितंबर 2023 में सरकार ने कमेटी बनाई थी
केंद्र सरकार ने 2 सितंबर को यह कमेटी बनाई थी। 23 सितंबर को दिल्ली के जोधपुर ऑफिसर्स हॉस्टल में कमेटी की पहली बैठक हुई। इसमें गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व सांसद गुलाम नबी आजाद समेत 8 मेंबर शामिल हुए।

कमेटी ने अपनी पहली बैठक में इस मुद्दे पर देश की राजनीतिक पार्टियों की राय जानने का फैसला किया था। इसके लिए कमेटी ने देश की 46 पॉलिटिकल पार्टियों को लेटर लिखकर उनके विचार मांगे थे। इसमें 6 नेशनल पार्टियां, 33 राज्य स्तर की पार्टियां और 7 गैर मान्यता पार्टी दल हैं।

क्या है वन नेशन वन इलेक्शन
भारत में फिलहाल राज्यों के विधानसभा और देश के लोकसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं। वन नेशन वन इलेक्शन का मतलब है कि पूरे देश में एक साथ ही लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव हों। यानी मतदाता लोकसभा और राज्य के विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय पर या चरणबद्ध तरीके से अपना वोट डालेंगे।

आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही होते थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं। उसके बाद 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई।

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साथ चुनाव के क्या फायदे-नुकसान, 7 सवालों के जवाब

पूरे देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर बहस छिड़ी हुई है। एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव साथ ही होंगे। क्या वाकई इस सत्र में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' बिल लाया जा सकता है? साथ चुनाव के क्या फायदे-नुकसान हैं? इन 7 सवालों के जवाब जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर...

'एक देश एक चुनाव' क्या है, PM मोदी क्यों लागू करना चाहते हैं

'वन नेशन वन इलेक्शन' सिर्फ चर्चा का विषय नहीं बल्कि भारत की जरूरत है। हर कुछ महीने में कहीं न कहीं चुनाव हो रहे हैं। इससे विकास कार्यों पर प्रभाव पड़ता है।' नवंबर 2020 में PM नरेंद्र मोदी ने 80वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये बात कही थी। वन नेशन वन इलेक्शन क्या है? PM मोदी इसे क्यों लागू करना चाहते हैं? पढ़ें पूरी खबर...

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कांग्रेस एक देश, एक चुनाव का विरोध करती है: खड़गे बोले- इसके लिए संविधान की मूल संरचना को बदलना होगा - Dainik Bhaskar
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'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर मल्लिकार्जुन खड़गे का जवाब, कहा- कांग्रेस इसका विरोध करती है - News18 हिंदी

नई दिल्ली: ‘एक देश, एक चुनाव’ को लेकर जारी कवायद के बीच कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विचार का विरोध करते हैं. मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस विचार को दरकिनार कर हाई पावर कमेटी को भंग किया जाए. मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस बाबत ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ के लिए उच्च स्तरीय समिति के सचिव को पत्र लिखा है. उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि कांग्रेस ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ के विचार का कड़ा विरोध करती है.

दरअसल, मल्लिकार्जुन खड़गे का यह पत्र ऐसे वक्त में आया है, जब बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर उच्च स्तरीय समिति के प्रमुख रामनाथ कोविंद ने एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्तों (सीईसी) और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के साथ विचार-विमर्श शुरू किया. उनकी बैठकें समिति द्वारा इस मुद्दे पर जनता की राय मांगने के कुछ दिनों बाद हुई हैं.

‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर उच्च स्तरीय समिति के प्रमुख राष्ट्रपति कोविंद ने बुधवार को दिल्ली में मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मुनीश्वर नाथ भंडारी से मुलाकात की. बयान में कहा गया कि एक राष्ट्र एक चुनाव पर विचार-विमर्श जारी रखते हुए उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष कोविंद ने दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गोरला रोहिणी और पूर्व सीईसी सुशील चंद्रा के साथ चर्चा की.

जब चंद्रा और न्यायमूर्ति रोहिणी ने कोविंद से मुलाकात की तब विधि सचिव नितेन चंद्रा भी मौजूद थे. चंद्रा उच्च स्तरीय समिति के सचिव भी हैं. इसमें कहा गया है कि परामर्श प्रक्रिया आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी. सूत्रों ने कहा कि चंद्रा ने एक साथ चुनाव कराने के विचार का समर्थन करते हुए कहा कि इससे शासन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी क्योंकि सरकारों को नीतियां बनाने और लागू करने के लिए अधिक समय मिलेगा.

समझा जाता है कि उन्होंने यह भी कहा कि एक साथ चुनाव कराने से जनता की असुविधा कम होगी, मानव संसाधनों के उपयोग में सुधार होगा और बार-बार चुनाव कराने पर होने वाले खर्च में कमी आएगी. समिति पहले ही इस मुद्दे पर आम जनता और राजनीतिक दलों से सुझाव मांग चुकी है और उनपर विचार कर चुकी है. उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, संवैधानिक विशेषज्ञों और पूर्व सीईसी सहित प्रख्यात न्यायविदों से भी उनके विचार जानने के लिए संपर्क किया गया है.

'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर मल्लिकार्जुन खड़गे का जवाब, कहा- कांग्रेस इसका विरोध करती है

पिछले साल सितंबर में गठन के बाद से समिति की अब तक दो बैठकें हो चुकी हैं. इसने हाल में राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर एक साथ चुनाव कराने के विचार पर उनकी राय मांगी थी और ‘परस्पर सहमत तिथि’ पर बातचीत के लिये कहा था. बाद में समिति ने पार्टियों को एक अनुस्मारक भेजा था. छह राष्ट्रीय पार्टियों, 33 राज्य स्तरीय दलों और सात पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों को पत्र भेजे गए. समिति ने एक साथ चुनाव कराने पर विधि आयोग के विचार भी सुने हैं। इस मुद्दे पर दोबारा विधि आयोग से राय ली जा सकती है. (इनपुट भाषा से)

Tags: Congress, Mallikarjun kharge, One Nation One Election

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'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर मल्लिकार्जुन खड़गे का जवाब, कहा- कांग्रेस इसका विरोध करती है - News18 हिंदी
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Ram Mandir Ayodhya News: लकड़ी और कपड़े से बनाया गया राममंद‍िर का भव्य श‍िखर, देखें तैयारि‍यां - Aaj Tak

Ram Mandir Ayodhya News: लकड़ी और कपड़े से बनाया गया राममंद‍िर का भव्य श‍िखर, देखें तैयारि‍यां

प्राण प्रतिष्ठा के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं. राम मंदिर के अधूरे शिखर को कपड़े और लकड़ी से बनाया गया है. इस शिखर को फूलों से सजाया जाएगा ताकि ऐसा लगे कि मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है. देखें वीडियो.

Preparations are in full swing for the inauguration of Ram Mandir. Temple's peak is being constructed with clothes and wood. This temporary spire will be decorated with flowers. Watch the video.

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Ram Mandir Ayodhya News: लकड़ी और कपड़े से बनाया गया राममंद‍िर का भव्य श‍िखर, देखें तैयारि‍यां - Aaj Tak
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'हां, ये सही है लेकिन क्या मुल्क में यही चलता रहेगा...', ASI रिपोर्ट पर बोले प्रोफेसर इरफान हबीब - Aaj Tak

ज्ञानवापी परिसर की ASI सर्वे रिपोर्ट को लेकर हिंदू पक्ष ने कई दावे किए हैं. गुरुवार को वकील विष्णु शंकर जैन ने रिपोर्ट सार्वजनिक की. उन्हों...