एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: वर्तिका तोलानी Updated Tue, 25 May 2021 12:11 PM IST
सार
सबसे वरिष्ठ मंत्री और क्रॉस-पार्टी स्वीकृति होने की वजह से राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अधिकारी, सभी राज्यों के शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और राज्य परीक्षा बोर्ड के अध्यक्ष के साथ बैठक आयोजित की गई थी।
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राजनाथ सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों के समूह (जीओएम) का नेतृत्व करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को चुनाव किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार के सबसे वरिष्ठ मंत्री और क्रॉस-पार्टी स्वीकृति होने की वजह से राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अधिकारी, सभी राज्यों के शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव और राज्य परीक्षा बोर्ड के अध्यक्ष के साथ बैठक आयोजित की गई थी। 12वीं की बोर्ड परीक्षा आयोजित करने के प्रस्तावों पर की गई चर्चा में सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' भी शामिल थे।
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शिक्षा मंत्री ने राजनाथ सिंह को बैठक में शामिल करने की बताई वजह
शिक्षा मंत्री का कहना है कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिसमें खुद प्रधानमंत्री शामिल हैं। देश के बहुत सारे विद्यार्थियों पर इस फैसले का प्रभाव पड़ेगा इसलिए प्रधानमंत्री ने राजनाथ जी को भी इस बैठक में शामिल होने के लिए कहा है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि यह मामला हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है। एक जून तक परीक्षाओं के संबंध में फैसला आने की उम्मीद है। वहीं एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक पीएम मोदी ने परामर्श के बाद इस बैठक की अध्यक्षता के लिए राजनाथ सिंह को चुना क्योंकि पीएम न केवल अपने सबसे वरिष्ठ मंत्री को बल्कि इस क्षेत्र में अनुभव रखने वाले किसी व्यक्ति को जिम्मेदारी देना चाहते थे।
1991 में बने थे शिक्षा मंत्री, लया था यह महत्वपूर्ण कानून
बता दें कि राजनाथ सिंह पहली बार 1991 में शिक्षा मंत्री बने जब पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाई थी। सिंह ने दो साल के लिए पोर्टफोलियो संभाला और 1992 में, नकल विरोधी अधिनियम लाया जिसके तहत चीटिंग एक गैर-जमानती अपराध बना गया और पुलिस को छापे मारने के लिए परीक्षा हॉल में आने की अनुमति मिल गई।
सभी राज्यों को इस बैठक में शामिल करने के लिए लिया गया यह फैसला
दूसरे वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता यह थी कि कैसे इस बैठक में सभी राज्यों को शामिल किया जाए। राजनाथ सिंह की सभी पार्टियों में अच्छी स्वीकार्यता है और इसलिए राजनाथ सिंह को चुना गया। वरिष्ठता में, वह सर्वोच्च मंत्री हैं।
राजनाथ सिंह को चुनने से मिला फायदा, सभी दल हुए शामिल
दोनों वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि सरकार की रणनीति काम की और राजनाथ सिंह को चुनने से फायदा भी मिला। क्योंकि सभी विपक्षी दल के मंत्री इस कार्यक्रम में शामिल हुए और बैठक में बोर्ड परीक्षा आयोजित करने की व्यापक सहमति भी बन गई।
शिक्षा मंत्री के कार्यालय से आया यह बयान
निशंक के कार्यालय द्वारा यह बयान दिया गया है कि राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में यह बैठक बुलाने से शिक्षा मंत्री को कमजोर नहीं किया गया। शिक्षा मंत्री अभी तक कोविड से पूरी तरह से ठीक नहीं हुए हैं। पहले भी परीक्षा के संबंध में हुई बैठक की अध्यक्षता पीएम द्वारा की गई थी, इसलिए राजनाथ की मौजूदगी में हमारी अध्यक्षता करने का कोई सवाल ही नहीं है।
सिंह, सरकार के लिए पर्दे के पीछे रहकर कर रहे थे वार्ता
रविवार की बैठक में, सिंह का हस्तक्षेप सभी उपस्थित लोगों को संक्षेप में अपना प्रस्ताव रखने के लिए बोलने तक ही सीमित था। ताकि सभी को मौका मिले और ज्यादा समय न लगे। अपनी समापन टिप्पणी में, उन्होंने सभी राज्यों से लिखित में अपनी राय देने को कहा, जो कि सरकार के अंतिम निर्णय पर पहुंचने से पहले एक या दो दिन में मिलने की उम्मीद है। सिंह इस साल की शुरुआत में किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकार के लिए पर्दे के पीछे रहकर वार्ता कर रहे थे। जब वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर आधिकारिक तौर पर किसानों से बात कर रहे थे, सिंह अपने आवास पर प्रमुख किसान नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे।
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12वीं बोर्ड परीक्षा: जानिए क्यों राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बुलाई गई थी बैठक, शिक्षा मंत्री ने क्या कहा - अमर उजाला - Amar Ujala
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