
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Amit Mandal Updated Sat, 05 Jun 2021 05:42 AM IST
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कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि बैठक का एजेंडा दरअसल कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच मतभेद को पाटने के लिए था। जिस समय कैप्टन के साथ चर्चा हो रही थी, उस वक्त राहुल और प्रियंका गांधी वाड्रा भी वीडियो कांफ्रेंस के जरिये चर्चा से जुड़े थे। तीन घंटे तक चली बैठक में कैप्टन ने समिति के सदस्यों को विधायकों और नेताओं द्वारा खुद पर लगे आरोपों का जवाब दिया। मुख्यमंत्री अपने साथ दस्तावेजी प्रमाण लाए थे, जो विधायकों और पंजाब कांग्रेस के नेताओं के काम कराने के सुबूत थे। कांग्रेस नेता और समिति के एक सदस्य हरीष रावत ने कहा कि सोनिया गांधी दो तीन दिनों के लिए बाहर हैं, इसलिए बैठक की पूरी रिपोर्ट तीन चार दिन बाद पार्टी अध्यक्ष को सौंपा जाएगा। तीन सदस्यीय समिति में रावत के अलावा मल्लिकार्जुन खरगे और जेपी अग्रवाल भी शामिल हैं।
इससे पहले सोमवार को समिति ने पहली बैठक में पंजाब के 25 विधायकों से मुलाकात की थी। समिति के एक सदस्य ने कहा कि शुक्रवार की बैठक पार्टी की पंजाब इकाई के झगड़े को सुलझाने के लिए आखिरी बैठक थी। समिति ने पांच दिनों में पंजाब के 100 से अधिक नेताओं और विधायकों का पक्ष जाना।
नेतृत्व तक पहुंचा दी पंजाब की सच्चाई : सिद्धू
मंगलवार को समिति के सदस्यों के साथ बैठक में नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा था कि उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पंजाब की सच्चाई और अपनी बात मजबूती से पहुंचा दी है। उन्होंने बैठक के बाद मीडिया कर्मियों से बातचीत में कहा था, मैं हाईकमान के बुलावे पर आया हूं और पंजाब के लोगों की बात नेता तक पहुंचा दी है।
कैप्टन को बुलाना समर्थकों को गवारा नहीं
पंजाब को लेकर नेतृत्व ने जिस तरह की कवायद की उसे लेकर पांचवें दिन तक बात बनने से अधिक बिगड़ने का खतरा बढ़ गया था। दरअसल कैप्टन खेमे ने मुख्यमंत्री को सफाई देने के लिए बुलाने को मुख्यमंत्री की वरिष्ठता और सम्मान से जोड़ दिया। हालांकि कैप्टन ने कमेटी के सामने पहुंच कर अपना पक्ष रखने का फैसला किया। कैप्टन ने कमेटी के सामने स्पष्ट किया कि उन पर अकालियों का समर्थन का आरोप लगाया जा रहा है, जबकि वह लगातार उनके निशाने पर रहे हैं।
कांग्रेस का पंजाब संकट: मंत्रिमंडल में फेरबदल को तैयार कैप्टन, सत्ता के दो ध्रुव नामंजूर - अमर उजाला - Amar Ujala
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