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Tuesday, June 15, 2021

गलवां संघर्ष की बरसी: सोनिया गांधी ने कहा- घटना को लेकर अब तक स्पष्टता नहीं, देश को भरोसे में ले सरकार - अमर उजाला - Amar Ujala

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 15 Jun 2021 03:43 PM IST

सार

14-15 जून 2020 की रात लद्दाख की गलवां घाटी में भारत व चीन के जवानों में झड़प हुई थी। इसमें 20 भारतीय जवान शहीद हुए थे। जवाबी कार्रवाई में चीन के भी कई जवान मारे गए थे। 
 

गलवां घाटी में शहीद हुए योद्धाओं के लिए बनाया गया स्मारक - फोटो : Amar Ujala

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विस्तार

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गलवां घाटी में शहीद 20 जवानों की पहली बरसी पर मंगलवार को कहा कि एक वर्ष का समय गुजरने के बाद भी इस घटना से जुड़े हालात को लेकर स्पष्टता नहीं है। सरकार देश को विश्वास में ले और यह सुनिश्चित करे कि उसके कदम देश के जवानों की प्रतिबद्धता के अनुकूल रहे हैं।
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सोनिया ने जवानों के बलिदान को याद किया और यह दावा किया कि सैनिकों के पीछे हटाने का जो समझौता चीन के साथ हुआ है उससे भारत का नुकसान दिखाई पड़ता है। कांग्रेस अध्यक्ष ने एक बयान में कहा, '14-15 जून, 2020 की रात को चीन की पीएलए के साथ हुई झड़प को एक साल पूरा हो गया है। इसमें बिहार रेजीमेंट के हमारे 20 जवानों की जान चली गई थी। कांग्रेस हमारे जवानों के सर्वोच्च बलिदान को याद करने में राष्ट्र के साथ शामिल है।

पीएम का पिछले साल आया था वक्तव्य
उनके मुताबिक, इसका बहुत ही धैर्य का साथ इंतजार किया गया कि सरकार सामने आएगी और देश को उन हालात के बारे में बताएगी, जिनमें यह अप्रत्याशित घटना घटी तथा वह लोगों को विश्वास दिलाएगी की हमारे जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। सोनिया ने कहा, अब कांग्रेस पार्टी अपनी इस चिंता को फिर से प्रकट करती है कि अब तक कोई स्पष्टता नहीं है और इस विषय पर प्रधानमंत्री का आखिरी वक्तव्य पिछले साल आया था कि कोई घुसपैठ नहीं हुई। 

चीन से समझौते में नुकसान का अंदेशा
हमने प्रधानमंत्री के बयान के संदर्भ में बार-बार ब्यौरा मांगा और अप्रैल, 2020 से पूर्व की यथास्थिति बहाल करने की दिशा में हुई प्रगति का विवरण भी मांगा। चीन के साथ सेनाओं को पीछे हटाने का जो समझौता हुआ है, उससे लगता है कि यह अब तक भारत के लिए पूरी तरह नुकसानदेह रहा है।


गौरतलब है कि पिछले साल 14-15 जून की दरम्यानी रात पीएलए के सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में 20 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद में कई खबरों के माध्यम से यह जानकारी सामने आई कि इस झड़प में चीन के भी कई सैनिक मारे गए। 

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