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Wednesday, June 16, 2021

कोरोना टीका: NTAGI के तीन वैज्ञानिकों ने कहा- सहमति बिना हुआ दो खुराक के बीच का समय दोगुना; सरकार बोली थी इसकी सिफ़ारिश पर लिया फैसला - Jansatta

पूरे मामले पर एनटीएजीआई के अध्यक्ष एन के अरोड़ा ने मंगलवार को कहा कि कोविशील्ड टीके की दो खुराकों के बीच अंतराल को बढ़ाने का निर्णय वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर पारदर्शी तरीके से लिया गया है। 

ड्राइव-थ्रू टीकाकरण शिविर में कोविड वैक्सीन लगवाती महिला। (पीटीआई फोटो)

कोरोना संक्रमण से बचाने वाली वैक्सीन कोविशील्ड के दो डोज के बीच के अंतराल को सरकार ने 6-8 सप्ताह से बढ़ाकर 12 से 16 सप्ताह कर दिया था। सरकार की तरफ से इसके पीछे राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी परामर्श समूह (NTAGI) के प्रस्ताव का हवाला दिया गया था। अब एनटीएजीआई के तीन वैज्ञानिकों ने कहा है कि सरकार की तरफ से यह फैसला बिना सहमति के लिया गया था।

एनटीएजीआई के पूर्व निदेशक एम डी गुप्ते ने कहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैक्सीन लगाने के बीच अंतराल को बढ़ाकर 8-12 सप्ताह करने का सुझाव दिया था। लेकिन इसे बढ़ाकर 12-16 सप्ताह करने के पीछे कोई तर्क नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई आंकड़ा मौजूद नहीं है। हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से ट्वीट कर कहा गया है कि इस संबंध में समूह के सदस्यों के बीच कोई मतभेद नहीं था।

गुप्ते का बयान उनके सहयोगी मैथ्यू वर्गीस द्वारा दिए गए बयान की तरह ही है। जिन्होंने कहा है कि समूह की सिफारिश केवल 8-12 सप्ताह के लिए थी। सात सदस्यों वाले कोविड वर्किंग ग्रुप के सदस्य जे पी मुलियाल ने कहा है कि एनटीएजीआई के भीतर टीके की खुराक के अंतराल को बढ़ाने पर चर्चा हुई थी, लेकिन 12-16 सप्ताह की सिफारिश नहीं की गयी थी।

हालांकि पूरे मामले पर एनटीएजीआई के अध्यक्ष एन के अरोड़ा ने मंगलवार को कहा कि कोविशील्ड टीके की दो खुराकों के बीच अंतराल को बढ़ाने का निर्णय वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर पारदर्शी तरीके से लिया गया है।

बताते चलें कि 13 मई को स्वास्थ्य मंत्रालय के बयान में कहा गया था कि उसने एनटीएजीआई के कोविड ​​​​कार्य समूह द्वारा दो डोज के बीच 12-16 सप्ताह के अंतर की सिफारिश को स्वीकार कर लिया है। सरकारी स्वास्थ्य अधिकारियों ने 15 मई को एक अन्य संवाददाता सम्मेलन में बताया था कि टीके की कमी को दूर करने के लिए यह अंतर नहीं बढ़ाया गया है, बल्कि यह एक “वैज्ञानिक निर्णय” है।

इधर इस मामले पर वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील, जिन्होंने हाल ही में सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए अपना पद छोड़ दिया था ने कहा है कि अधिकारियों को खुराक के बीच के अंतर को दोगुना करने के निर्णय के कारणों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

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