- शुरैह नियाज़ी
- बीबीसी हिंदी के लिए, भोपाल से
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रेखा यादव भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल के बाहर अपने रिश्तेदारों के साथ बैठी हुई हैं. उन्हें पता चला है कि उनके पुत्र अंकुश यादव और बहु रचना यादव की जुड़वा बच्चियों में से एक की मौत हो चुकी है और दूसरी बच्ची के बचने की संभावना लगभग 10 प्रतिशत है.
दोनों जुड़वा बच्चियों का जन्म शहर के एक निजी अस्पताल में सोमवार की सुबह हुआ था. उसके बाद उन्हें शहर के सरकारी कमला नेहरू अस्पताल में रखा गया था लेकिन देर रात उनमें से एक बच्ची की मौत अस्पताल में लगी आग की वजह से हो गई.
रेखा यादव ने बताया, "हम लोग दरवाज़े पर खड़े थे उसी वक़्त यह आग लगी और भगदड़ मच गई. डॉक्टर मैडम वहां से फौरन चली गईं. हम अंदर घुसे लेकिन धुएं की वजह से कुछ भी नहीं दिख रहा था. देर रात हमें बताया गया कि हमारी दो बच्चियों में से एक अब इस दुनिया में नहीं रही वहीं दूसरी बच्ची के बचने की संभावना बहुत कम है."

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अंकुश यादव और रचना यादव की शादी हुए लगभग दो साल हुए थे उसके बाद उनको ये जुड़वा बच्चियां हुई थीं लेकिन उनकी खुशी 24 घंटे भी नहीं रह पाई.
परिवार अब कमला नेहरू अस्पताल के बाहर इस बात का इंतज़ार कर रहा है कि बच्चियों को उन्हें सौंप दिया जाएगा.
शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया के परिसर में बने कमला नेहरू अस्पताल के बाहर लोगों को जमावड़ा लगा हुआ है.

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कितने बच्चों की मौत?
सरकारी आंकड़ों की बात करें तो चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग का कहना है कि इस हादसे में चार बच्चों की मौत हुई है. लेकिन अस्पताल के बाहर मौजूद कई लोगों का दावा है कि उनके बच्चे की मौत के बारे में भी उन्हें बताया गया है. इस तरह बच्चों की मॉर्चरी में कुल 7 शव रखे हुए हैं.
हालांकि अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि तीन बच्चों की मौत दूसरी वजहों से हुई है.
अस्पताल के बाहर आमिर भी मौजूद है. उनका चार दिन का बच्चा भी अब इस दुनिया में नहीं रहा है.
आमिर की पत्नी तरन्नुम ने शहर के एक अन्य सरकारी अस्पताल सुलतानिया ज़नाना अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था.
आमिर ने बताया, "बच्चा थोड़ा कमज़ोर था इस वजह से उसे यहां पर लाए थे. शाम को छह बजे मैं बच्चे को देख कर गया था तब तक बच्चा अच्छा था. लेकिन उसके बाद खाना लेने घर गया और साढ़े आठ बजे जब लौटा तो यहां पर आग लग चुकी थी और उसे बुझाने का प्रयास किया जा रहा था."
उन्होंने बताया कि रात में बारह बजे के बाद उन्हें लेकर अंदर गए लेकिन इस दौरान अस्पताल में ऊपर-नीचे करवाते रहे और लगभग ढाई बजे उन्हें बताया गया कि उनका बच्चा ख़त्म हो गया है.
आमिर बताते हैं, "मुझे अभी तक नहीं बताया गया है कि बच्चा कहां पर है और न मैंने उसे देखा है. न मेरे बच्चे का नाम उन चार बच्चों में है जो मंत्रीजी ने बताया है. लेकिन मेरे बच्चे की मौत की वजह दूसरी बीमारी बताई जा रही है जबकी उसकी मौत इसी आग की वजह से हुई है."
वही आमिर की पत्नी अभी भी सुलतानिया अस्पताल में भर्ती हैं और उसे बच्चे की मौत के बारे में बताया नहीं गया है.

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बच्चों को बदलने का आरोप
शहर के इस अस्पताल के बाहर कई बदहवास परिवारों को देखा जा सकता था जिन्हें अपने बच्चों की तलाश है. कई का दावा है कि उनका बच्चा अच्छा था लेकिन उसके बावजूद उसे उन्होंने मरा बता दिया है. उनका दावा है कि उनके बच्चों को बदल दिया गया है.
अरुण और सोनाली की शादी पिछले साल हुई थी. तीन भाइयों में यह पहला बच्चा था. परिवार का दावा है कि उनके खानदान में बच्चे ही नहीं थे और बरसों बाद यह बच्चा पैदा हुआ. बच्चे का जन्म सोमवार को दोपहर लगभग एक बजे हुआ था.
बच्चे की मां सोनाली अभी अस्पताल में हैं उनकी स्थिति गंभीर है.
सोनाली की मौसी शीला ने बताया, "रात में दो बजे जब सारी मीडिया चली गई तब हमें बताया गया कि हमारा बच्चा नहीं रहा. हम देख कर आए कि हमारा बच्चा ज़िंदा है. हम जबरदस्ती अंदर गए और हमने अपने बच्चे को पहचान लिया और देख कर आए कि वो अच्छा है. हां उसका चेहरा काला हो गया है, धुएं की वजह से लेकिन वो मान नहीं रहे हैं."
शीला ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन उनसे एक काग़ज़ पर साइन कराना चाह रहा था लेकिन उन्होंने उस पर साइन करने से इनकार कर दिया.
एक अन्य परिवार के मोहम्मद सलमान खान अपनी चार साल की भतीजी के इंतज़ार में अस्पताल के बाहर खड़े थे. बच्ची को इंन्फेक्शन था जिसकी वजह से उसे यहां पर लाया गया था.
अरशी और मंसूर खान की यह पहली बच्ची है. लेकिन परिवार को नहीं पता है कि बच्ची जिंदा है कि नहीं. आग लगने के वक़्त अरशी भी अस्पताल में मौजूद थीं. लेकिन आग लगने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई. परिवार को अभी तक बच्ची के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा रही है.
कुछ लोग अपने मोबाइल पर बच्चों की फ़ोटो बार बार देख रहे हैं और बता रहे हैं कि उनका बच्चा अब भी ज़िंदा है.

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जांच के आदेश
राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को हुई इस घटना के लिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए थे. जिसके बाद अधिकारी सुबह ही अस्पताल पहुंच गए थे.
वहीं मंत्री विश्वास सारंग ने मीडिया से कहा कि वार्ड में 40 बच्चे मौजूद थे जिनमें से 36 बच्चों का इलाज किया जा रहा है.
विश्वास सारंग का दावा है कि आग लगने के कुछ देर बाद ही वो अस्पताल में पहुंच गए थे और उन्होंने डॉक्टरों और दूसरे स्टाफ की मदद से बच्चों को बचाया.
लेकिन कई परिजनों का दावा है कि अस्पताल के ज़्यादातर कर्मचारी आग लगने के बाद भाग गए और उन्हें भी अंदर जाने से रोक दिया गया जिसकी वजह से वह कुछ नहीं कर सके.

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काफी वक़्त के बाद कुछ परिजनों ने कांच तोड़ कर घुसने का प्रयास किया लेकिन तब तक धुआं इतना भर चुका था कि वो कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं थे.
मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि इस घटना की जांच के बाद जो भी इसके लिए ज़िम्मेदार पाया जाएगा उसके ख़िलाफ़ कारवाई की जाएगी. जिस फ़्लोर में आग लगी थी वहां से बच्चों को हटा कर अस्पताल की दूसरी मंज़िल के पीडियाट्रिक्स सर्जरी विभाग में अभी रखा गया है. वहीं कुछ बच्चों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है.
राजधानी भोपाल में स्थित आठ मंजिल के इस अस्पताल में आग के लिए कोई भी इंतज़ाम नहीं था. इस अस्पताल में लगभग 400 मरीज़ हमेशा भर्ती रहते हैं. वहीं यह बात भी सामने आई कि अस्पताल के पास बिल्डिंग की फायर एनओसी भी नहीं थी.
नगर निगम के फायर ऑफिसर रामेश्वर नील के मुताबिक़ कमला नेहरू अस्पताल ने एनओसी नहीं ली थी. इसके साथ ही आग को काबू करने के लिए अस्पताल में लगे उपकरण भी काम नहीं कर रहे थे. अभी तक जो पता लगा है उसके मुताबिक़ आग शार्ट सर्किट की वजह से लगी थी. वहीं बहुत कोशिश के बावजूद भी कमला नेहरू अस्पताल के प्रबंधन से इस मुद्दे पर बात नहीं हो पाई.
भोपाल के अस्पताल में आगः परिजन का आरोप-बच्चों को छोड़ भाग गए कर्मचारी - BBC हिंदी
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