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Tuesday, June 1, 2021

CBSE 12th Exam 2021 Live Updates : कोरोना के चलते CBSE बोर्ड की 12वीं की परीक्षाएं रद्द, पीएम मोदी की बैठक में फैसला - Hindustan

CBSE 12th Exam 2021 Live Updates : 12वीं बोर्ड परीक्षाओं का रद्द कर दिया गया है।  पीएम मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार शाम हुई बैठक में फैसला लिया गया। बैठक में उन्हें तमाम राज्यों और हितधारकों से मिले सुझावों एवं व्यापक विचार विमर्श से निकल रहे विभिन्न विकल्पों के बारे में बताया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई मीटिंग में केंद्रीय मंत्री अमित शाह, प्रकाश जावड़ेकर, पीयूष गोयल, धर्मेन्द्र प्रधान, निर्मला सीतारमण मौजूद थे। इसके अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल हुए। 

23 मई को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई हाईलेवल मीटिंग के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा था कि 12वीं बोर्ड परीक्षाओं पर एक जून को या इससे पहले अंतिम फैसला ले लिया जाएगा। इसके अलावा केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में भी कहा कि दो दिनों के भीतर 12वीं बोर्ड परीक्षाओं पर फैसला ले लिया जाएगा। इसके अलावा राज्य भी शिक्षा मंत्रालय को परीक्षाओं के आयोजन को लेकर अपने सुझाव भेज चुके हैं। यानी अब बस सीबीएसई और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के फैसले का इंतजार है। 

Live Update : यहां पढ़ें 12वीं बोर्ड परीक्षाओं पर फैसले से जुड़ा लाइव अपडेट

06:00 PM : पीएम मोदी ने परीक्षा को लेकर कई केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक की। इसमें केंद्रीय मंत्री अमित शाह, प्रकाश जावड़ेकर, पीयूष गोयल, धर्मेन्द्र प्रधान, निर्मला सीतारमण एवं शिक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में परीक्षा के आयोजन से जुड़े विभिन्न सुझावों और विकल्पों पर मंथन हुआ।

04:41 PM - रद्द हो सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा, पिछली परफॉर्मेंस के आधार पर पास हों छात्र: केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र से एक बार फिर कोरोना महामारी के चलते 12वीं बोर्ड परीक्षा रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि बच्चों का रिजल्ट पिछली परफॉर्मेंस के आधार पर निकाला जाना चाहिए। ये अपील उन्होंने पीएम मोदी की बैठक से पहले की।

03:48 PM - सीबीएसई परीक्षा को लेकर आज शाम 5 बजे पीएम मोदी अहम बैठक करेंगे।

02:35 PM - रमेश पोखरियाल निशंक एम्स में भर्ती

केंद्रीय शिक्षा मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक को कोविड-19 संक्रमण से स्वस्थ होने के बाद इससे संबंधित समस्याओं की वजह से मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया। 

01: 11 PM - अधिकतर राज्यों ने 12वीं बोर्ड परीक्षा अल्पावधि (दूसरा विकल्प) की कराने की वकालत की

- पहले विकल्प की खास बातें :
1-परीक्षाएं निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर कराई जाएं, जो कि सीमित हैं।
2-केवल 19 प्रमुख विषयों की परीक्षा कराई जाए।
3-कम महत्वपूर्ण विषयों में प्रदर्शन का आकलन प्रमुख विषयों में किए गए प्रदर्शन के आधार पर किया जाए।
4-इस विकल्प के अनुसार परीक्षा पूर्व की गतिविधियों के लिए एक महीने और परीक्षा कराने तथा नतीजे घोषित करने के लिए दो महीने की जरूरत है। इसके बाद कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए 30 दिन की जरूरत है।
5- दूसरे विकल्प के अनुरूप परीक्षा तभी हो सकती है कि जब बोर्ड के पास कम से कम तीन महीने का सुरक्षित समय उपलब्ध हो।
6-परीक्षाएं कराने का संभावित महीना अगस्त हो सकता है और पूरी प्रक्रिया सितंबर अंत तक खत्म होगी।
7-किसी कारण बस यदि तीन महीने का समय नहीं मिल पाता है और परिस्थितियां सुरक्षित परीक्षा कराने के अनुकूल नहीं रहती हैं, तो यह विकल्प व्यावहारिक नहीं होगा।

- दूसरे विकल्प के प्रमुख तथ्य :
1-सीबीएसई बोर्ड द्वारा 12वीं कक्षा की परीक्षाएं दो बार कराई जा सकती हैं।
2-जहां अनुकूल स्थितियां हों, वहां उपयुक्त तारीख से परीक्षा शुरू की जा सकती हैं। इसके बाद के बचे हुए स्थानों पर परीक्षाएं 15 दिन बाद शुरू होंगी।
3-तय तिथि पर कोरोना संबंधित कारणों से कोई विद्यार्थी परीक्षा नहीं दे पाए, तो उसे परीक्षा में बैठने का दूसरा मौका दिया जाए।
4-प्रश्न पत्र इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजे जाएंगे ताकि परीक्षाओं में वाहनों को लगाने की जरूरत ना पड़े। परीक्षाओं का संचालन लचीला और जिम्मेदारीपूर्ण बनाने पर जोर।

1:01 PM - - 23 मई को हुआ था मंथन, अधिकांश राज्य परीक्षा के आयोजन के पक्ष में 
केंद्र सरकार ने सीबीएसई की 12वीं की बोर्ड परीक्षा, राज्य बोर्ड परीक्षाओं एवं प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर 23 मई को राज्यों के साथ गहन मंत्रणा की थी।  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में केंद्र ने बोर्ड परीक्षाओं को लेकर दो विकल्प राज्यों के समक्ष रखे। सूत्रों का कहना है कि 75 फीसदी राज्य दूसरे विकल्प पर सहमत नजर आए जिसमें बोर्ड परीक्षाएं दो बार करने का जिक्र है। 

दूसरे विकल्प पर 75 फीसदी राज्य सहमत:
सूत्रों ने कहा कि 75 फीसदी राज्य दूसरे विकल्प पर सहमत हैं। केंद्र द्वारा सुझाए जिस दूसरे विकल्प पर राज्य सहमत दिखे उनमें बोर्ड परीक्षाएं स्कूल में ही कराने, सिर्फ 19 प्रमुख विषयों की परीक्षा कराने, प्रश्न पत्र की अवधि डेढ़ घंटे का रखने, सभी प्रश्नों को वस्तुनिष्ठ स्वरुप में देने, दो बार परीक्षाएं कराने ताकि कोई छात्र कोरोना से संबंधित कारणों के चलते एक बार शामिल नहीं हो सके तो दूसरी बार शामिल हो जाए, की बात कही गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि छात्र को एक भाषा और तीन इलेक्टिव पेपर देने होंगे। जबकि पांचवें एवं छठे पेपर में उसे पिछली परीक्षा के आधार पर अंक दिए जाएंगे।

पहले विकल्प में था बोर्ड के नियम पर जोर:
पहले विकल्प में 19 प्रमुख विषयों की परीक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर कराने का प्रस्ताव था जिसमें बाकी पूरी परीक्षा बोर्ड के नियमों के तहत कराने की बात कही गई थी। सरकार ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया करने में तीन महीने का समय लग सकता है। केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि जुलाई या अगस्त तक परीक्षा के लिए उपयुक्त स्थितियां होने के आसार हैं। कुछ राज्यों ने विल्कप एक एवं दो में से कुछ बिन्दुओं को मिलाकर भी परीक्षाएं आयोजित करने की बात कही है।

high level meeting on cbse 12th exam jee neet and board exams

12:56 PM - शिक्षकों और छात्रों का टीकाकरण:
बैठक में झारखंड और गोआ के मुख्यमंत्री तथा उत्तर प्रदेश और दिल्ली के उप मुख्यमंत्री शामिल हुए। कई राज्यों ने परीक्षा से पूर्व शिक्षकों का टीकाकरण का सुझाव दिया। दिल्ली ने शिक्षकों के साथ-साथ छात्रों को भी टीका लगाने की बात कही।

12:55 PM - शीर्ष अदालत ने कोविड-19 महामारी के चलते 12वीं बोर्ड परीक्षा रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई 3 जून तक स्थगित कर दी। सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, 'यदि आप पिछले साल वाली पॉलिसी से अलग रुख अपना रहे हैं तो आपको इसके लिए ठोस कारण बताना चाहिए।'

12:25 PM - रिजल्ट फॉर्मूले को लेकर स्टूडेंट्स अलग-अलग सुझाव दे रहे हैं। कुछ स्टूडेंट्स कह रहे हैं कि  ऐसे आइडियाज लेकर आने चाहिए जिसेस स्टूडेंट्स की विषय के प्रति समझ का पता चल सके। उदारण के तौर पर स्टूडेंट्स का वीडियो कॉल से सब्जेक्ट वाइज इंटरव्यू लिया जा सकता है। इससे किसी टॉपिक पर उसकी समझ के स्तर का अच्छे से पता चल जाएगा। एक स्टूडेंट ने कहा, 'केवल मुख्य विषयों की परीक्षा होनी चाहिए। तीन से ज्यादा पेपर नहीं होने चाहिए। शेष विषयों के मार्क्स इंटरनल असेसमेंट से लग जाने चाहिए। पेपर तीन घंटे की बजाय 2 घंटे का होना चाहिए।'' 

11:55 AM - परीक्षा रद्द करने के लिए छात्रों का मुख्य न्यायाधीश को पत्र
सीबीएसई की परीक्षा रद्द करने को लेकर 297 छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में छात्रों ने मुख्य न्यायाधीश से मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए परीक्षा रद्द करने की मांग की है। छात्रों ने फिज़िकल परीक्षा को रद्द करने की मांग के साथ ही पिछले वर्ष की तरह वैकल्पिक मूल्यांकन योजना बनाने का निर्देश देने की भी मांग की है।


11:30 AM  - सीबीएसई बोर्ड परीक्षा की योजना पर अलग-अलग राय
कोरोना महामारी के दौर में अलग प्रारूप में 12वीं कक्षा की परीक्षा आयोजित करने की सरकार की योजना पर शिक्षा क्षेत्र बंटा हुआ नजर आ रहा है, जबकि विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों का एक समूह इसे रद्द करने की मांग कर रहा है। कई लोगों की दलील है कि परीक्षाएं अहम होती हैं और वैकल्पिक मूल्यांकन इंसाफ नहीं कर पाएगा। हालांकि अन्य लोगों की राय है कि विद्यार्थियों और अध्यापकों का कल्याण ऐसी असाधारण स्थिति में सर्वोपरि है। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष नीरज कुंदन ने कहा-इन 19 विषयों के लिए परीक्षाएं आयोजित करना समान रूप से खतरनाक है, वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह एक ऐसा जोखिम सरकार को नहीं लेना चाहिए। इंडिया वाइड पैरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष अनुभा श्रीवास्तव ने कहा-बोर्ड परीक्षाओं को लेकर कोई सर्वसम्मत निर्णय नहीं होने के करण भारत में पूरी अराजकता है, यह सब पूर्व नियोजित है, उनकी जुलाई में परीक्षाएं आयोजित करने की योजना है क्योंकि उनके पास ऑनलाइन परीक्षा के लिए इंतजाम नहीं हैं, अंदरूनी मूल्यांकन उनकी विफलता है।

11:00 AM - सीबीएसई ने 14 अप्रैल को कोरोना वायरस मामलों में वृद्धि को देखते हुए कक्षा 10 की परीक्षा रद्द करने और कक्षा 12 वीं की परीक्षा स्थगित करने की घोषणा की थी।

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Covid-19 ने उजाड़ दिया पूरा परिवार, एक साथ 5 सदस्यों की तेरहवीं देख हर कोई गमगीन - Zee News Hindi

लखनऊ: कोरोना की इस महामारी ने लोगों की जिंदगी बदलकर रख दी और कई परिवारों पर तो यह बीमारी कहर बनकर टूटी है. यूपी की राजधानी लखनऊ में भी ऐसा ही एक परिवार है जहां कोरोना ने महीनेभर में 8 लोगों की जीवनलीला खत्म कर दी. इस परिवार में एक साथ 5 लोगों की तेरहवीं हुई जिसे देखकर हर कोई गमगीन हो गया.

एक साथ 5 लोगों की तेरहवीं

आजतक में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक परिवार की 4 महिलाएं विधवा हो गईं और कई बच्चे यतीम हो गए हैं. सोमवार को एक साथ परिवार के 5 लोगों की 13वीं हुई और जिसने भी यह मातम देखा उसका दर्द आंसुओं में छलक पड़ा. परिवार के 7 लोगों की मौत कोरोना संक्रमण की वजह से हुई जबकि एक बुजुर्ग को हार्ट अटैक हुआ था.

राजधानी के इमलिया पूर्वा गांव में रहने वाले परिवार के लिए मानो कोरोना किसी काल के रूप में आया और सबकुछ उजाड़ कर चला गया. परिवार के किसी एक शख्स की मौत का गम झेलना ही मुश्किल होता है, ऐसे में एक साथ पूरे परिवार को इस कोरोना ने तबाह कर दिया. 

प्रशासन ने नहीं ली कोई सुध

इस परिवार के 8 लोग 25 अप्रैल से 15 मई के बीच कोरोना संक्रमण की चपेट में आए थे फिर एक-एक कर मौत के मुंह में समाते चले गए. ग्राम प्रधान मेवाराम ने बताया कि गांव में ऐसी त्रासदी बीतने के बाद भी प्रशासन की आंखें नहीं खुली हैं और अब तक न सरकार की ओर से कोई मदद आई, न ही गांव में सैनिटाइजेशन का काम हुआ है. यही नहीं इतने बड़ी तादाद में लोगों की मौत के बाद भी अब तक कोई जांच-पड़ताल नहीं की गई है.

ये भी पढ़ें: कोरोना से पिता की मौत के बाद शव को जेसीबी से दफनाया, नहीं किया कोई क्रिया-कर्म

कोरोना से जान गंवाने वालों में 35 वर्षीय युवक से लेकर 82 साल की बुजुर्ग महिला शामिल हैं. परिवार के लोगों का आरोप है कि सही वक्त पर इलाज, अस्पताल में बेड और ऑक्सीजन का इंतजाम न होने की वजह से उनके अपने इस दुनिया को छोड़कर चले गए.  

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अलीगढ़ शराब कांड: 85 मौतों से मचे हाहाकार से टूटने लगी सत्ता की नींद, सामने आ रही मिलीभगत - अमर उजाला - Amar Ujala

अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़ Published by: प्राची प्रियम Updated Tue, 01 Jun 2021 02:30 PM IST

सार

अलीगढ़ जहरीली शराब कांड को चार दिन बीत गए हैं। 85 लोगों की मौत के बाद पूरे इलाके में जो हाहाकार मचा है उससे सरकार और प्रशासन की नींद टूटने लगी है। धीरे-धीरे पूरे मामले पर से पर्दा उठ रहा है और लोगों के बीच न्याय की उम्मीद जगनी शुरू हुई है। 

इस हादसे से लखनऊ तक हिल गया है। अब स्थिति ऐसी है कि मुख्यमंत्री योगी खुद मामले के पल पल की रिपोर्ट ले रहे हैं। वहीं डीएम स्तर से भी अब शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है। इसके बावजूद कई पहलू ऐसे हैं जिससे यह पता चलता है कि यह सबकी मिलीभगत से हुआ है-

अलीगढ़ में जहरीली शराब का तांडव - फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

पल-पल की अपडेट ले रहे मुख्यमंत्री योगी
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सीएम योगी आदित्यनाथ इस मामले में पल-पल की अपडेट ले रहे हैं। इधर, शासन को भी लगातार डीएम स्तर से रिपोर्ट दी जा रही है। अपर मुख्य सचिव व आबकारी के प्रमुख सचिव संजय भूसारेड्डी ने डीएम से सोमवार दोपहर में वार्ता की थी। इसमें उन्होंने शराब कांड से हुईं मौतों, अब तक की गई कार्रवाई आदि की रिपोर्ट ली थी। सीएम योगी आदित्यनाथ मामले में पूरी तरह से निगाह बनाए हुए हैं। जानकारी मिली है कि जल्द ही सीएम या डिप्टी सीएम स्तर से कोई एक अलीगढ़ का दौरा करने के लिए आ सकता है।

हटाए गए आबकारी अधिकारी
अलीगढ़ शराब कांड में बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकार ने आबकारी आयुक्त पी गुरुप्रसाद को हटा दिया है। इससे पहले संयुक्त आबकारी आयुक्त स्तर तक के अफसरों पर ही कार्रवाई हुई थी। इस मामले में अब तक 13 पुलिसकर्मी और आबकारी विभाग के आधा दर्जन से अधिक अधिकारी व कर्मी निलंबित किए जा चुके हैं। गुरुप्रसाद को प्रतीक्षारत करते हुए प्रतिनियुक्ति से लौटे रिग्जयान सैंफिल को नया आबकारी आयुक्त बनाया गया है।

मिथाइल अल्कोहल की फैक्टरी का संचालक गिरफ्तार
शराब तस्कर 50 हजारी इनामी विकास की सूचना पर पुलिस-आबाकारी व प्रशासन की टीम ने तालानगरी की इस फैक्टरी के संचालक कारोबारी विजेंद्र कपूर व उनके एकाउंटेंट को गिरफ्तार कर फैक्टरी से 40 हजार लीटर मिथाइल अल्कोहल बरामद किया है। साथ ही फैक्टरी को सील कर दिया है। गिरफ्तार दोनों लोगों पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया है। इस कार्रवाई के दौरान दस घंटे तक चली जांच में फैक्टरी की वैद्यता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। सुबह आबकारी प्रयोगशाला भेजे गए सैंपल की जांच में देर शाम यह पुष्टि हो गई है कि जब्त किया गया माल मिथाइल अल्कोहल ही है।

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स्काईमेट का मानसून आ गया, IMD का 3 जून को: 2012 से हर साल अलग भविष्यवाणी; 2015 में दोनों ने कहा था 100% से ... - Dainik Bhaskar

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7 घंटे पहले

केरल में बीते दो दिनों से बारिश हो रही है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने रविवार दोपहर मानसून के केरल पहुंचने का ऐलान कर दिया। लेकिन मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि मानसून 3 जून को केरल पहुंच सकता है। देश के मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली इन दोनों प्रमुख संस्‍थाओं के अनुमान कभी एक समान नहीं होते।

बीते 10 सालों के आंकड़े हमने देखे, मानसून की तारीख से लेकर बारिश के औसत तक में दोनों के आंकड़े अलग होते हैं। इतना ही नहीं, कई बार ये सच्चाई से काफी दूर भी होते हैं। 2015 में स्काईमेट ने देश में दीर्घावधि औसत (LPA) के मुकाबले 102% और मौसम विभाग ने 93% बारिश का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक बारिश 86% हुई। LPA 880 मिलीमीटर है।

फिलहाल स्काईमेट क्या कह रहा है
स्काईमेट के उपाध्यक्ष महेश पहलावत ने कहा, सभी मानक पूरे हो रहे हैं। पहला, केरल, लक्षद्वीप, कर्नाटक के 14 केंद्रों में से 60% में 10 मई के बाद दो दिनों तक 2.5 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज हो जाए। दूसरा, वहां जमीनी सतह से तीन-चार किलोमीटर तक पश्चिमी हवाएं चलने लगें। तीसरा, जमीनी सतह के करीब हवा की गति 30-35 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रहे। ये सभी मानक, केरल में पूरे हो चुके हैं। ये मानसून की आमद है।

मौसम विभाग का क्या दावा है
मौसम विभाग ने कहा कि 10 मई के बाद 'ताऊ ते' तूफान अरब सागर से गुजरा। तब लक्षद्वीप, केरल, कर्नाटक के तटीय इलाकों में 2.5 मिलिमीटर से 100-150 गुना ज्यादा (20-30 सेमी) तक बारिश दर्ज हुई थी। रेडिएशन भी काफी नीचे आ गया था। तब क्या हमें केरल में मानसून आने की घोषणा कर देनी चाहिए थी। विभाग अपने तय मानकों का उल्लंघन नहीं कर सकता।

इन अनुमानों से आम लोगों पर क्या असर पड़ता है
कम और ज्यादा बारिश का असर सीधे देश की GDP पर पड़ता है, क्योंकि मानसून की स्थिति से ही ये अंदाजा लगाया जाता है कि इस साल सूखा पड़ेगा या बाढ़ आने वाली है। इसीलिए मौसम की जानकारी देने वाली प्राइवेट भारतीय एजेंसी स्काईमेट हर साल मानसून (जून से सितंबर) के दो महीने पहले यानी अप्रैल में ही बता देती है कि कितनी बारिश की संभावना है।

स्काईमेट के जीपी शर्मा कहते हैं कि ये पूर्वानुमान लगाने के लिए उनकी मौसम वैज्ञानिकों की टीम देश के हर 9 किलोमीटर के बाद एक जांच करती है। वहां हवा के बहाव, तापमान, दबाव की स्थिति को नापती है और उसके आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करती है।

पहले हर 27 किमी के बाद जांच करता था स्काईमेट, टारगेट हर 3 किमी का
इंडियन एयरफोर्स में एयरमार्शल रहे जीपी शर्मा कहते हैं कि पहले स्काईमेट हर 27 किलोमीटर की दूरी के बाद जांच कर के अनुमान लगाता था, लेकिन अब तकनीकी विकास के चलते हर 9 किलोमीटर के बाद जांच तक पहुंच गए हैं, लेकिन ये आखिरी पड़ाव नहीं है। संस्‍था का लक्ष्य है कि हर तीन किमी की जांच तक पहुंचा जाए, तब जाकर और ज्यादा सटीक जानकारी दी जा सकेगी।

2015 में अनुमान से 16% कम बारिश, राजस्‍थान-गुजरात में बड़ी बात
ठीक इसी तरह अप्रैल-मई में ही भारत सरकार का मौसम विभाग (IMD) भी अपने अनुमान बताता है। इन्हीं दोनों को आधार मानकर कृषि, बाढ़ और आपदाओं की तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं। ऐसे में इन दोनों संस्‍थाओं के आंकड़ों में कितनी शुद्धता है, ये जानना बेहद जरूरी है। इसीलिए हमने खबर की सबसे पहली इमेज में बीते 10 सालों में स्काईमेट, मौसम विभाग के अनुमानों और वास्तविक बारिश के आंकड़ों को रखा है।

आंकड़ों के अनुसार साल 2015 में स्काईमेट ने LPA के मुकाबले 102% बारिश होने और मौसम विभाग ने 93% बारिश होने की संभावनाएं जताई थीं, जबकि वास्तविक बारिश LPA के मुकाबले 86% ही हुई। ये बीते 10 सालों में सबसे खराब अनुमान लगाया गया था। तब के अनुमान से 16% कम बारिश हुई। जीपी शर्मा कहते हैं कि केरल और कर्नाटक में 16% बारिश के कम या ज्यादा होने से अधिक प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन राजस्‍थान और गुजरात के किसानों के लिए ये बड़ी बात होती है। इसलिए मानसून को लेकर सटीक अंदाजा लगाना बेहद जरूरी है।

उनका कहना है, 'गलतियों के आसार हमेशा बने रहते हैं, क्योंकि भारत संस्कृति में ही नहीं, वायुमंडल के लिहाज से भी काफी विविधता से भरा है। यहां जंगल, पर्वत और सपाट तीनों का भरपूर मिश्रण है। इसलिए एकदम सही अंदाजा लगा पाना बेहद कठिन है।'

पश्चिमी विक्षोभ का असर जून से सितंबर वाले साउथ-वेस्ट मानसून पर बेहद कम
भारत में बरसात के लिए एक बड़ी वजह पश्चिमी देशों से चलने वाली हवाएं भी हैं। स्काईमेट के महेश पलावत के अनुसार हमारे देश में लगातार पश्चिम से पूर्व की ओर हवा चलती है। ये हवाएं यूरोपीय देशों से शुरू होती हैं। चूंकि रास्ते में इराक, ईरान और पाकिस्तान में कोई ऐसा पहाड़ नहीं है, जो उनका रास्ता मोड़ दे, इसलिए वो जम्मू के पर्वतों से टकराने के बाद उत्तर भारत में अच्छी-खासी बरसात का कारण बनती हैं। इसके चलते पंजाब, हरियाणा और यहां तक कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक में बारिश होती है, लेकिन अक्टूबर से लेकर मार्च के बीच। यानी सर्दियों में होनी वाली बारिश इसके कारण होती है।

जीपी शर्मा कहते हैं कि भारत में जिसे वाकई वर्षा ऋतु माना गया है, उस दौरान जून से लेकर सितंबर तक बारिश गर्मी के दौरान बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बने वाष्प के चलते होती है। इसमें पश्चिमी विक्षोभ की भूमिका अधिक प्रभावशाली नहीं होती।

जब सरकार अनुमान जाहिर करती है तो प्राइवेट एजेंसी के पूर्वानुमान की जरूरत क्यों?
स्काईमेट के जीपी शर्मा कहते हैं कि पहले मौसम विभाग के आंकड़ों में और असल में बारिश के आंकड़ों में काफी फर्क नजर आता था। जबसे स्काईमेट ने भारत में काम शुरू किया है, तब से मौसम विभाग ने भी काफी सतर्कता के साथ काम शुरू कर दिया है। प्राइवेट एजेंसी की जरूरत का सीधा कोई मतलब नहीं है, लेकिन प्रतियोगिता बढ़ने से देश के किसानों और लोगों को सही जानकारी मिलती है तो इसमें कोई नुकसान भी नहीं है।

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Who is HK Dwivedi? जिन्हें ममता बनर्जी ने बनाया बंगाल का नया Chief Secretary - Zee News Hindi

नई दिल्ली: बंगाल में पूर्व चीफ सेक्रेटरी अलपन बंदोपाध्याय पर मचे बवाल के बाद अब सूबे को नया मुख्य सचिव मिल गया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को बताया कि गृह सचिव एचके द्विवेदी नए चीफ सेक्रेटरी होंगे और बीपी गोपालिका को द्विवेदी के स्थान पर नियुक्त किया जाएगा. साथ ही ममता बनर्जी ने अलपन बंदोपाध्याय को तीन साल के लिए मुख्यमंत्री का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया है.

कौन हैं एचके द्विवेदी?

इसके बाद एचके द्विवेदी ने बंगाल के नए चीफ सेक्रटरी का चार्ज भी संभाल लिया है. द्विवेदी 1988 बैच के IAS अधिकारी है और पूर्व चीफ सेक्रेटरी अलपन बंदोपाध्याय से एक साल जूनियर हैं. वह अब तक सूबे के होम सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रही थे और उनके पास लंबा प्रशासनिक अनुभव है.

एचके द्विवेदी बंगाल की ममता सरकार के साथ लंबे वक्त से काम कर रहे हैं. वह सूबे के संसदीय और सांख्यिकी विभाग को भी देख रहे थे. इसके अलावा वह बंगाल में वित्त मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी के तौर पर भी काम कर चुके हैं. इसके अलावा वह बंगाल में वित्त मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी के तौर पर भी काम कर चुके हैं. वह साल 2012 के बाद से ही बंगाल विद्युत कॉर्पोरेशन के मेंबर हैं और ऐसे में सूबे की नौकरशाही में काम करने का उनका अनुभव काफी पुराना है. नए चीफ सेक्रेटरी भी अलपन बंदोपाध्याय की तरह बंगाल कैडर से ही आते हैं. 

क्यों बदले चीफ सेक्रेटरी?

दरअसल बंगाल के पूर्व चीफ सेक्रेटरी अलपन बंदोपाध्याय 31 मई को रिटायर होने वाले थे लेकिन केंद्र ने बीती 24 मई को उन्हें बंगाल सरकार की सिफारिश के बाद तीन महीने का एक्टेंशन दे दिया. विवाद तब शुरू हुआ जब 28 मई को केंद्र ने उनका ट्रांसफर दिल्ली कर दिया. सीएम ममता इस फैसले से काफी नाराज हो गईं और उन्हें केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा.

ये भी पढ़ें: अलपन बंदोपाध्याय से पहले भी अफसरों के लिए केंद्र से टकरा चुकी हैं सीएम ममता

ममता बनर्जी ने सोमवार को मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को रिटायरमेंट की इजाजत देते हुए उन्हें अपने सलाहकार पद पर नियुक्ति दे दी. ममता ने केंद्र सरकार के फैसले को अंवैधानिक बताते हुए कहा कि बंगाल सरकार अलपन को दिल्ली भेजने के लिए तैयार नहीं है. 

फिलहाल अलपन के रिटारमेंट को केंद्र सरकार की ओर से मंजूरी मिलना बाकी है. जानकारी के मुताबिक केंद्र का आदेश न मानने को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है.

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CBSE 12th Board Exam 2021 LIVE: सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा पर पीएम मोदी की मीटिंग, ये है अपडेट - Navbharat Times

एलोपैथी विवाद: बाबा रामदेव के खिलाफ आज देश भर में डॉक्टरों का प्रदर्शन - अमर उजाला - Amar Ujala

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 01 Jun 2021 07:16 AM IST

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विस्तार

एलोपैथी चिकित्सा को लेकर बाबा रामदेव के साथ डॉक्टरों का विवाद बढ़ता ही जा रहा है। स्थिति यह है कि मंगलवार यानी आज बाबा रामदेव के खिलाफ देश भर में डॉक्टरों का प्रदर्शन होगा। कोरोना महामारी के बीच इस विवाद ने सरकारों को भी चिंता में डाल दिया है।
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स्थिति यह है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने हाल ही में बाबा रामदेव को पत्र लिख बयान वापस लेने की मांग तक की थी लेकिन उसके बाद भी यह विवाद नहीं थमा जिसके चलते अब न सिर्फ निजी बल्कि सरकारी अस्पतालों में कार्यरत रेजीडेंट डॉक्टरों ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने की घोषणा की है। बाबा रामदेव के खिलाफ प्रदर्शन सुबह 8 बजे से शुरू हो जाएगा।

सोमवार को फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा), इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और फेमा सहित कई चिकित्सीय संगठनों ने बाबा रामदेव के खिलाफ प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इसमें कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, एमपी और राजस्थान तक सरकारी अस्पतालों में कार्यरत रेजीडेंट डॉक्टरों ने हिस्सा लेने की जानकारी दी है।

चिकित्सीय संगठनों के अनुसार महामारी के बीच मरीजों की जान बचाना उनके लिए पहली प्राथमिकता है। इसीलिए चिकित्सीय व्यवस्था में कोई बाधा न आते हुए वे सभी काली पट्टी बांधकर बाबा रामदेव के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। इनकी मांग है कि अगर जल्द ही सरकार ने बाबा रामदेव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की तो यह विरोध प्रदर्शन और भी अधिक आक्रामक देखने को मिल सकता है।

इनके अलावा दिल्ली एम्स, सफदरजंग अस्पताल सहित केंद्र सरकार के अधीन अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लेने की घोषणा की है। वहीं ऋषिकेश, भोपाल, पटना सहित अलग अलग एम्स के रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने भी बाबा रामदेव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को समर्थन दिया है।

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एलोपैथी विवाद: बाबा रामदेव के खिलाफ आज देश भर में डॉक्टरों का प्रदर्शन - अमर उजाला - Amar Ujala
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