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Friday, April 1, 2022

पंजाब: सीएम मान बोले- पठानकोट हमले के बाद सेना भेजने पर केंद्र ने मांगे थे 7.5 करोड़, राजनाथ सिंह ने इस बात पर किए थे माफ - अमर उजाला - Amar Ujala

एनएनआई, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sat, 02 Apr 2022 12:50 AM IST

सार

पंजाब विधानसभा में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के प्रति केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाया। कहा कि पठानकोट हमले के बाद पंजाब को 7.5 करोड़ का बिल भेज दिया था।

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विस्तार

पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पठानकोट हमले के दौरान पंजाब में सेना आई और मुकाबला किया। कुछ दिनों बाद हमें चिट्ठी मिली कि पंजाब हमें 7.5 करोड़ रुपये दे क्योंकि हमने सेना भेजी थी। हम तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह के पास गए और कहा कि 7.5 करोड़ रुपये हमारे सांसद निधि से काट लीजिए पर हमें लिखकर दे दीजिए कि हमने पंजाब को किराए पर सेना दी, पंजाब देश का हिस्सा नहीं है। सबसे पहले बंदूक की गोलियां हमारी छाती पर चलती हैं। इसके बाद बात न बढ़े इसलिए उन्होंने पैसे माफ किए। 
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सदन में मान ने बताया कि आतंकवादियों ने 2016 में जब पठानकोट एयरबेस पर हमला किया तो केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ राज्य के पुलिस बल ने निजी सुरक्षा की परवाह किए बिना आतंकवादियों के हमले का जवाब दिया।


 

केंद्र ने इस संबंध में राज्य को केंद्रीय सुरक्षा बल मुहैया करवाने के एवज में 7.50 करोड़ रुपये का बिल दिया था। अंत में यह रकम उस समय के केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के निजी दखल से उनके साथी सांसद साधु सिंह के साथ मुलाकात के बाद माफ कर दी गई। मान ने कहा कि यह बहुत विरोधाभासी है कि सरहदी राज्य जो आतंकवाद की मार झेल रहा है, को भी अपनी सुरक्षा के लिए
मोटी रकम अदा करनी पड़ी है।
 

पीएम मोदी पर साधा निशाना
पंजाब विधानसभा में भगवंत मान ने कहा कि दिल्ली में कोई भी काम करना हो तो उपराज्यपाल से अनुमति मांगनी पड़ती है वहां सीएम का कुछ नहीं चलता, क्योंकि वहां सरकार किसी और पार्टी की बनी हुई है। पंजाब ने केंद्र सरकार से एक्स्ट्रा बिजली मांगी लेकिन हमें मना कर दिया गया और हरियाणा को दे दिया। साथ ही कहा कि दूसरी तरफ पीएम मोदी कहते हैं कि सबका साथ सबका विकास तो कहां है साथ? ना आपको साथ देना है और ना ही आपको साथ लेना है।

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"CBI की साख गहरी सार्वजनिक जांच के घेरे में, विश्वसनीयता पर सवाल," बोले भारत के मुख्य न्यायाधीश - India TV हिंदी

Chief Justice of India, NV Ramana- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO Chief Justice of India, NV Ramana

Highlights

  • "CBI की कार्रवाई और निष्क्रियता ने कुछ मामलों में सवाल खड़े किए"
  • "अलग-अलग जांच एजेंसियों को एक तंत्र के नीचे लाने के जरूरत"
  • सीजेआई बोले- निष्पक्षता और स्वतंत्रता का प्रतीक था सीबीआई

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एन वी रमण ने शुक्रवार को एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। सीजेआई ने कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विश्वसनीयता समय बीतने के साथ सार्वजनिक जांच के घेरे में आ गई है क्योंकि इसकी कार्रवाई और निष्क्रियता ने कुछ मामलों में सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने अलग-अलग जांच एजेंसियों को एक तंत्र के नीचे लाने के लिए एक ‘‘स्वतंत्र शीर्ष संस्था’’ बनाने का भी आह्वान किया। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘जब CBI की बात आती है तो शुरुआती चरण में इस पर जनता का काफी भरोसा था। वास्तव में, न्यायपालिका को सीबीआई को जांच के स्थानांतरण के कई अनुरोध मिलते थे क्योंकि यह निष्पक्षता और स्वतंत्रता का प्रतीक था।’’ 

न्यायमूर्ति रमण ने कहा, ‘‘जब भी नागरिकों को अपने राज्य की पुलिस के कौशल और निष्पक्षता पर संदेह हुआ, उन्होंने सीबीआई से जांच कराने की मांग की क्योंकि वे चाहते थे कि न्याय किया जाए। लेकिन, समय बीतने के साथ हर प्रतिष्ठित संस्था की तरह, CBI भी गहरी सार्वजनिक जांच के घेरे में आ गई है। इसके कार्यों और निष्क्रियता ने कुछ मामलों में इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं।’’ दरअसल, प्रधान न्यायाधीश सीबीआई के 19वें डीपी कोहली स्मृति व्याख्यान में ‘‘लोकतंत्र: जांच एजेंसियों की भूमिका और जिम्मेदारियां’’ विषय पर बोल रहे थे। 

इस दौरान उन्होंने कहा कि CBI, गंभीर घोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO), प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी विभिन्न एजेंसियों को एक छत के नीचे लाने के लिए संयुक्त संस्था के गठन की तत्काल आवश्यकता है।’’ न्यायमूर्ति रमण ने कहा कि निकाय को ‘‘एक कानून के तहत बनाया जाना चाहिए’’ जो स्पष्ट रूप से इसकी शक्तियों, कामों और कर्तव्यों को परिभाषित करे। उन्होंने कहा, ‘‘संस्था के प्रमुख को विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ प्रतिनियुक्तियों द्वारा सहायता प्रदान की जा सकती है। यह संस्था कार्यवाही के दोहराव को समाप्त करेगी।’’ 

मुख्य न्यायाधीश रमण ने कहा, ‘‘इन दिनों ऐसे कई उदाहरण हैं जब एक मामले की कई एजेंसियों द्वारा जांच की जाती है, जिससे अक्सर सबूत कमजोर पड़ जाते हैं, बयानों में विरोधाभास आता है। यह संस्थाओं को परेशान करने के उपकरण के रूप में दोषी ठहराए जाने से भी बचाएगा।’’ न्यायमूर्ति रमण ने कहा कि पुलिस और जांच एजेंसियों के पास वास्तविक वैधता हो सकती है, लेकिन फिर भी संस्थाओं के रूप में उन्हें अभी भी सामाजिक वैधता हासिल करनी है। उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस को निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए और अपराध की रोकथाम पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें समाज में कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए जनता के सहयोग से भी काम करना चाहिए।’’ 

न्यायमूर्ति रमण ने कहा कि एक संस्था के रूप में सीबीआई के पास कई उपलब्धियां हैं और इस प्रक्रिया में उसके कई कर्मियों ने अपने स्वास्थ्य और जीवन को खतरे में डाल लिया है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘कुछ ने तो सर्वोच्च बलिदान भी दिया है। इन सबके बावजूद यह विडंबना ही है कि लोग निराशा के समय पुलिस के पास जाने से कतराते हैं। भ्रष्टाचार, पुलिस ज्यादती, निष्पक्षता की कमी और राजनीतिक वर्ग के साथ घनिष्ठता के आरोपों से पुलिस की संस्था की छवि खेदजनक रूप से धूमिल हुई है।’’ 

न्यायमूर्ति रमण ने सीबीआई के संस्थापक निदेशक डी पी कोहली को श्रद्धांजलि दी और कहा कि वह एक अनुकरणीय अधिकारी थे। उन्होंने कहा, ‘‘कोहली अपने साहस, दृढ़ विश्वास और उल्लेखनीय दक्षता के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी दृष्टि ने सीबीआई को भारत की प्रमुख जांच एजेंसी में बदल दिया। उनकी निर्विवाद सत्यनिष्ठा के किस्से दूर-दूर तक सुनाए गए।’’ 

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राज्‍यसभा में बीजेपी की सेंचुरी, 1990 के बाद बनी पहली पार्टी जिसने छुआ यह आंकड़ा - Navbharat Times

Delhi Mask : दिल्ली में अब मास्क न पहनने पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा, आदेश जारी - NDTV India

नई दिल्ली:

DELHI MASK : दिल्ली में अब मास्क न पहनने पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा. इसके लिए शुक्रवार रात को आदेश जारी कर दिया गया है. दिल्ली सरकार ने इसके लिए आदेश जारी कर आम जनता को राहत दी है.  दिल्ली में घटती पॉजिटिविटी रेट और बड़ी आबादी के वैक्सीनेशन के चलते DDMA ने ये  फैसला लिया था. यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है. अभी सार्वजनिक जगहों पर दिल्ली में मास्क (Delhi Mask No Compulsory) ना पहनने पर 500 रुपये का जुर्माना था. अब केवल सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने की सलाह दी गई है, यह अपराध नहीं माना जाएगा. इससे पहले महाराष्ट्र में घटते कोरोना मामलों के बाद मास्क पहनने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है. इसको लेकर जनता ने राहत की बड़ी सांस ली है. देश के अन्य राज्यों में भी कोविड-19 के घटते मामलों के बीच मास्क पहनने की अनिवार्यता खत्म करने की वकालत की जा रही है. 

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दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की बैठक में गुरुवार को इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी. इस पर सभी संबंधित पक्षों और एजेंसियों की एकराय दिखी. कोविड प्रोटोकोल का पालन कराने के लिए अभी मास्क न पहनने पर 500 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है. पहले यह जुर्माना 2 हजार रुपये था, लेकिन पिछली डीडीएमए की बैठक में इसे घटा दिया गया था. दिल्ली में कोरोना से जुड़े बाकी के प्रतिबंध हटाए जाने की भी संभावना है.  दिल्‍ली में कोरोनावायरस के मामलों में कमी होने के बाद प्रतिबंधों में काफी ढ़ील दी गई है. आम आदमी पार्टी की सरकार ने 27 फरवरी को नाइट कर्फ्यू हटाने के साथ ही कई  पाबांदियों से जनता को राहत देने का ऐलान किया था. निजी कार में यात्रा करने वाले लोगों के लिए मास्क पहनने की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया गया था. 

महाराष्ट्र में भी मास्क पहनना अनिवार्य नहीं रह गया है. महाराष्‍ट्र में 2 अप्रैल से मास्‍क न पहनने पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा. कोरोना के मामलों में कमी के बाद महाराष्ट्र विकास अघाड़ी की सरकार ने सभी कोविड-19 प्रतिबंध हटाने का फैसला किया था. उद्धव ठाकरे की सरकार ने कहा था कि मास्‍क के इस्तेमाल की सलाह दी जाएगी, लेकिन यह अब अनिवार्य नहीं होगा. 

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CBI को चीफ जस्टिस रमना की दो टूक: बोले- आपने लोगों का भरोसा खोया, राजनेताओं से गठजोड़ तोड़ें तभी लौटेगी साख - Dainik Bhaskar

नई दिल्ली2 घंटे पहले

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यानी CJI एनवी रमना ने कहा है कि CBI ने अपनी क्रेडिबिलिटी खो दी है। उन्होंने कहा कि CBI को फिर से पब्लिक ट्रस्ट हासिल करने पर ध्यान देना चाहिए। जस्टिस रमना ने शुक्रवार को कहा, 'अगर आपको फिर से क्रेडिबिलिटी हासिल करनी है, तो सबसे पहले राजनेताओं से गठजोड़ तोड़ना होगा और साख वापसी के लिए फिर से काम करना होगा।'

न्यूज एजेंसी के मुताबिक 'लोकतंत्र में जांच एजेंसी की भूमिका और जिम्मेदारी' विषय पर लेक्चर के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा, 'वक्त के साथ पॉलिटिकल एग्जीक्यूटिव बदलते रहेंगे, लेकिन आप (CBI) परमानेंट हैं।' CJI ने भारत में पुलिस सिस्टम पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पुलिस की वर्किंग स्टाइल आज भी ब्रिटिश जमाने जैसी है। इसे बदलने की जरूरत है।

चीफ जस्टिस ने CBI को राजनीतिक गठजोड़ से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा, 'वक्त के साथ पॉलिटिकल एग्जीक्यूटिव बदलते रहेंगे, लेकिन आप परमानेंट हैं।'

चीफ जस्टिस ने CBI को राजनीतिक गठजोड़ से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा, 'वक्त के साथ पॉलिटिकल एग्जीक्यूटिव बदलते रहेंगे, लेकिन आप परमानेंट हैं।'

देश में एक स्वायत्त जांच एजेंसी बने
चीफ जस्टिस ने कहा कि CBI सहित सभी जांच एजेंसियों को एक छत के नीचे लाने की जरूरत है और इसके लिए एक स्वायत्त (ऑटोनॉमस) जांच एजेंसी बननी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि इसकी जिम्मेदारी एक इंडिपेंडेंट पर्सन को दी जानी चाहिए।

जस्टिस रमना ने कहा कि जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रखने के लिए एक ऑटोनॉमस इन्वेस्टिगेशन बॉडी बनाने की जरूरत है।

जस्टिस रमना ने कहा कि जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रखने के लिए एक ऑटोनॉमस इन्वेस्टिगेशन बॉडी बनाने की जरूरत है।

मॉडर्न टेक्नोलॉजी और ट्रेंड अफसरों की कमी
चीफ जस्टिस ने कहा कि एक ओर जहां सेंट्रल एजेंसी के पास वर्क लोड अधिक है, वहीं उसके पास संसाधनों की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि सीबीआई के पास मॉडर्न टेक्नोलॉजी, टेंड अधिकारी सहित कई बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। इसी वजह से कई बार केस सुलझाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

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CM भगवंत मान ने मांगा चंडीगढ़ पर पंजाब का पूरा अधिकार, विधानसभा में प्रस्ताव पास; खट्टर बोले- हरियाणा का भी हक - Aaj Tak

स्टोरी हाइलाइट्स

  • चंडीगढ़ पर पंजाब और केंद्र के बीच रार
  • विधानसभा में प्रस्ताव पास

चंडीगढ़ पर अधिकार को लेकर पंजाब और केंद्र सरकार के बीच खुलकर तनातनी शुरू हो गई है. केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारियों पर केंद्रीय सेवा नियमों के लागू होने से उखड़ी पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुला लिया. इसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चंडीगढ़ में केंद्रीय नियमों लागू करने के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया. जिसके बाद इस पर बहस शुरू हो गई है. 

पंजाब सरकार के वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने मुख्यमंत्री मान के प्रस्ताव का समर्थन किया. इस दौरान कांग्रेसी विधायकों ने रोकटोक शुरू किया तो हंगामा शुरू हो गया. पंजाब के सीएम भगवंत मान ने केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को पंजाब में शामिल करने का प्रस्ताव विधानसभा में पेश कर दिया, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया है. हालांकि, बीजेपी ने इसके विरोध में सदन से बहिष्कार किया. 

पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष और विधायक अश्विनी शर्मा का कहना है कि आज पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया था. सत्र में जो प्रस्ताव सरकार लेकर आई थी, उस पर तथ्य आधारित चर्चा होनी चाहिए थी. फिर चाहे कोई पक्ष में बोले या विपक्ष में, किसी को रोका नहीं जाना चाहिए था. लेकिन मुझे अपनी बात पूरी नहीं रखने दी गई. मुझे बोलने से रोका गया. पंजाब की जनता तक सही बात पहुंचे, इसलिए अपनी बात मीडिया के माध्यम से रख रहा हूं.

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बीजेपी विधायक ने कहा, पंजाब में एक परंपरा शुरू हो गई है कि अपनी नाकामयाबी छिपाने के लिए केंद्र  पर आरोप लगाकर हाय-तौबा मचाना शुरू कर दो यानी केंद्र की सरकार पर ठीकरा फोड़ दो. उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में लोगों को गुमराह करने के लिए आज विशेष सत्र बुलाया गया था. 

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अश्विनी शर्मा के मुताबिक, मैंने एक सवाल किया कि पंजाब रिऑर्गेनाइजेशन एक्ट की कौन-सी धारा का उल्लंघन किया गया?  पंजाब में 1966 से लेकर 1985 तक चंडीगढ़ में केंद्र के सर्विस रूल लागू रहे. 1986 से 1991 तक सर्विस रूल और केंद्र का पे स्केल भी लागू रहा, उससे क्या चंडीगढ़ पर असर पड़ा? चंडीगढ़ के कर्मचारियों ने केंद्र के सर्विस रूल की डिमांड की थी जिसके बाद यह फैसला लिया गया. राज्य सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए कि चंडीगढ़ के कर्मचारियों को इसकी जरूरत आखिर क्यों पड़ी?

BJP विधायक ने आगे कहा, पंजाब का चंडीगढ़ पर आज भी उतना ही दावा है जितना कि पहले था. पंजाब सरकार अभी तक छठे वेतन आयोग में फंसी हुई है और उधर केंद्र ने सातवां वेतन आयोग लागू भी कर दिया है.  मैंने तो सदन में भी कहा कि अगर पंजाब सातवां वेतन आयोग लागू कर दे तो फिर से कर्मचारी पंजाब के वेतन आयोग की मांग करेंगे, लेकिन इस मुद्दे पर सरकार चर्चा नहीं करेगी.  

पंजाब भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि चंडीगढ़ को लेकर हमारा स्टैंड क्लियर है कि चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार है, लेकिन सर्विस रूल लागू करने से यह अधिकार कम नहीं होता. हमने इस प्रस्ताव का विरोध किया है.  सदन में सरकार का रवैया ठीक नहीं था.  सबसे ज्यादा पंजाब के हित में पीएम मोदी ने फैसले किये हैं. प्रदेश सरकार जनता को गुमराह करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रही है. 

हरियाणा और पंजाब दोनों का चंडीगढ़ पर हक: CM खट्टर

उधर, चंडीगढ़ को पंजाब में स्थानांतरित करने की मांग के मामले को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि ऐसे प्रस्ताव पहले भी आ चुके हैं. चंडीगढ़ पर पंजाब का ही नहीं, हरियाणा का भी उतना ही हक है. उन्होंने कहा, 60 और 40 रेश्यो में चंडीगढ़ का बंटवारा हुआ था. हिमाचल भी अपना हिस्सा चंडीगढ़ में से मांगता है. चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब की दोनों की राजधानी रहेगी.  एक तरफा ऐसा प्रस्ताव लाना बेमानी बात है. 

CM भगवंत मान का दावा, पंजाब में ही तैयार होता है 'चिट्टा'

वहीं, इससे इतर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को पंजाब विधानसभा में बोलते हुए कहा, पंजाब के अंदर ही बड़ी मात्रा में नशा तैयार होता है. पंजाबी में चिट्टा जिसे हेरोइन भी कहा जाता है, वो बाहर से नहीं आती है बल्कि पंजाब में ही तैयार होती है. भगवंत मान ने कहा कि आने वाले समय में वह इसका पूरा ख़ुलासा करेंगे. गौरतलब है कि अब तक ये कहा जाता था कि पंजाब में नशा पाकिस्तान की तरफ से आता है और बीएसएफ लगातार इस तरह के ख़ुलासे भी करती रहती है कि बड़ी मात्रा में हेरोइन पंजाब से आ रही है, लेकिन भगवंत मान के इस बयान से पंजाब में नशे की पूरी थ्योरी बदल दी है. 

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Thursday, March 31, 2022

VIDEO: राज्यसभा सांसदों के विदाई समारोह में रूपा गांगुली ने गाया- आज जानें की जिद - ABP न्यूज़

राज्यसभा से रिटायर हो रहे 19 राज्यों के विभिन्न दलों के 72 सदस्यों को गुरुवार को विदाई दी गई. सभापति एम. वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मौके उपस्थित थे. इस अवसर पर कुछ सांसदों ने गाना गाकर सदस्यों को विदाई दी. बीजेपी सांसद रूपा गांगुली ने इस मौके पर ‘आज जाने की जिद न करो’ गाकर सुनाया. वहीं कई सांसदों ने मिलकर 1976 में रिलीज हुई फिल्म चलते-चलते का मशहूर गाना कभी ‘अलविदा न कहना’ गया. इस गीत को गाने वालों में भी रूपा गांगुली शामिल थीं.

अप्रैल में रिटायर हो रहे सदस्यों में सदन में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा, ए. के. एंटनी, बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी, एम. सी. मैरी कॉम और स्वप्न दासगुप्ता शामिल हैं.

जून में इनका कार्यकाल होगा खत्म
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सुरेश प्रभु, एम. जे अकबर, जयराम रमेश, विवेक तन्खा, वी. विजयसाई रेड्डी का कार्यकाल जून में समाप्त होगा.

जुलाई में ये सांसद होंगे रिटायर
जुलाई में रिटायर होने वाले सदस्यों में पीयूष गोयल, मुख्तार अब्बास नकवी, पी. चिदंबरम, अंबिका सोनी, कपिल सिब्बल, सतीश चंद्र मिश्रा, संजय राउत, प्रफुल्ल पटेल और के. जे. अल्फोंस शामिल हैं.

कुछ केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी नेताओं को फिर से नामित किया जाएगा वहीं कांग्रेस के कुछ सदस्यों को पुन: नामित किए जाने पर स्थिति स्पष्ट नहीं है. इनमें से कई सदस्य जी-23 में शामिल हैं जो पार्टी नेतृत्व की आलोचना करते रहे हैं.

गोयल बोले- रिटायर होने वाले सांसद बदल सकतें हैं अपनी पिच
रिटायर हो रहे सदस्यों के विदाई भाषण में गोयल ने कहा कि सदस्यों के कार्यकाल का समाप्त होना राजनीतिक पारी का एक पड़ाव भर है. उन्होंने इन सांसदों को सलाह भी दी कि कि वे चाहें तो अपनी पिच बदल सकते हैं.

गोयल ने कहा, ‘‘टेस्ट मैच लंबा है, हम सब खेलते रहेंगे. कोई उसी पिच पर खेलता है तो कुछ को मौका मिलता है पिच बदलने का. कई लोगों को अभी भी आमंत्रण है पिच बदलने का. पिच बदलना चाहें तो नए अवसर उपलब्ध हैं. मिल-जुल कर हम सब काम करें.’’

गोयल की यह सलाह ऐसे समय में काफी महत्वपूर्ण हो सकती है जबकि जी-23 समूह के कई कांग्रेसी नेताओं के उच्च सदन में फिलहाल वापसी के आसार स्पष्ट नहीं है.

नायडू ने आनंद शर्मा की विशेष तौर तारीफ की
राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने अपने संबोधन में यूं तो सभी विपक्षी नेताओं के कार्यकाल की सराहना की लेकिन उन्होंने गृह मंत्रालय संबंधी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में आनंद शर्मा का विशेष उल्लेख किया और उनके कामकाज की सराहना की.

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