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Sunday, April 3, 2022

आर्थिक संकट के बीच श्रीलंका के सभी मंत्रियों ने दिया इस्तीफा, महिंदा राजपक्षे बने रहेंगे पीएम - NDTV India

कोलंबो: Sri Lanka Economic Crisis : श्रीलंका के कैंडी शहर में सैकड़ों छात्रों ने श्रीलंका के आर्थिक संकट के विरोध में सरकार द्वारा लगाए गए सप्ताहांत कर्फ्यू का विरोध करते हुए इसका उल्लंघन किया. बिजली कटौती के साथ-साथ देश भोजन, ईंधन और अन्य आवश्यक चीजों की भारी कमी का सामना कर रहा है.

मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :

  1. श्रीलंका में गंभीर आर्थिक संकट (Sri Lanka Economic Crisis) के बीच महिंदा राजपक्षे (PM Mahinda Rajapaksa) की सरकार के सभी कैबिनेट मंत्रियों (Cabinet Ministers) ने एक साझा पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए सामूहिक इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने सरकार के खिलाफ बढ़ते गुस्से के बीच नई कैबिनेट के गठन का रास्ता साफ किया है. यह पत्र पीएम के पास है, जिसे वो राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को सौंपेंगे. हालांकि प्रधानमंत्री इस्तीफा नहीं देंगे और नई  कैबिनेट का गठन जल्द ही करेंगे.

  2. पहले खबरें आई थीं कि प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के सबसे बड़े बेटे नमल राजपक्षे ने पद से इस्तीफा दे दिया है. ये देश में पैदा हुए संकट के बीच नमल ने युवा मामलों और खेलकूद मंत्रालय से पद छोड़ दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर बैन की आलोचना भी की थी. वहीं श्रीलंका में आपातकालू लागू होने के बीच प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे की अटकलों को उनके कार्यालय ने गलत बताया है. देश में खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं के भारी संकट के बीच उन पर पद छोड़ने का भारी दबाव बना हुआ है.

  3. छात्रों ने रविवार को आर्थिक संकट के खिलाफ पेराडेनिया के बाहर प्रदर्शन किया. सरकार द्वारा लगाए गए एक सप्ताहांत कर्फ्यू का उल्लंघन कर रहे थे. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया. प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे औऱ राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को हटाने के लिए नारेबाजी की.

  4. श्रीलंका में शनिवार शाम 6 बजे से 36 घंटों के राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू का उल्लंघन करने और बदहाल आर्थिक संकट के मद्देनजर सरकार-विरोधी रैली आयोजित करने का प्रयास करने पर रविवार को देश के पश्चिमी प्रांत में 600 से अधिक व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया. राजधानी कोलंबो में विपक्षी नेताओं के मार्च में 100 से अधिक लोग शामिल हुए. इससे पहले पुलिस और राइफलें लिए हुए सैनिकों के एक बड़े समूह ने विपक्ष के नेता साजित प्रेमदासा के घर के पास मार्च को रोक लिया. यह कर्फ्यू सोमवार सुबह खत्म होगा.

  5. सरकार द्वारा सप्ताहांत कर्फ्यू का उल्लंघन करने के लिए विपक्षी सांसदों ने अपने नेता सजित प्रेमदासा के नेतृत्व में यहां ऐतिहासिक चौराहे की ओर विरोध मार्च शुरू किया था. सरकार ने प्रदर्शन के पूर्व नियोजित कार्यक्रम के मद्देनजर सप्ताहांत कर्फ्यू की घोषणा की थी.

  6. प्रेमदासा ने कहा, ‘‘हम प्रदर्शन करने से संबंधित जनता के अधिकारों के हनन के लिए सरकार द्वारा सार्वजनिक सुरक्षा अध्यादेश लागू करने का विरोध कर रहे हैं.'' ‘कोलंबो गज़ट' में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को पश्चिमी प्रांत में कुल 664 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है. रविवार को ‘अरब स्प्रिंग' शैली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले देशव्यापी कर्फ्यू घोषित किया गया था.

  7. श्रीलंका सरकार ने शनिवार रात को सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म (फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और यूट्यूब) को बंद कर दिया था ताकि राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को शांत किया जा सके.

  8. राष्ट्रपति गोटाबायो राजपक्षे ने शुक्रवार की देर रात एक विशेष गज़ट अधिसूचना जारी करके श्रीलंका में एक अप्रैल से तत्काल प्रभाव से आपातकाल लगा दिया था. सरकार ने रविवार को सोशल मीडिया तक जनता की पहुंच को समाप्त करने के लिए इंटरनेट सेवा पर रोक लगाने का आदेश दिया था तथा लोगों के एक जगह इकट्ठा होने पर रोक लगा दी थी.

  9. राजपक्षे के भतीजे एवं खेल मंत्री नमल राजपक्षे ने संवाददाताओं से कहा कि इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध अनुपयोगी है, क्योंकि बहुत सारे लोग सोशल मीडिया साइट से जुड़ने के लिए वीपीएन का इस्तेमाल करेंगे.

  10. श्रीलंका सरकार ने कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से राहत और भारत और चीन से कर्ज की मांग कर रही है. नई दिल्ली ने हाल ही में घोषणा की थी कि वह वित्तीय सहायता के हिस्से के रूप में कोलंबो को एक बिलियन अमेरिकी डालर की लाइन ऑफ क्रेडिट का विस्तार करेगी ताकि उसे पेट्रोलियम खरीदने में मदद मिल सके.

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Russia-Ukraine War: यूक्रेन के कीव से आई भयावह तस्वीर, सड़कों पर मिले 410 शव - Aaj Tak

स्टोरी हाइलाइट्स

  • बुचा के मेयर का आरोप- रूसी सैनिकों ने जानबूझकर नागरिकों को मारा है
  • रूसी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने यूक्रेन के दावों को बताया झूठा

रूस के कब्जे से मुक्त कराए गए कीव में 410 लोगों के शव बरामद किए गए हैं. बुचा इलाके में मिले शवों की जानकारी वहां के मेयर ने दी है. उधर, बुचा इलाके में इतनी भारी मात्रा में शवों के मिलने के बाद यूक्रेन की ओर से रूस पर  बुचा में नरसंहार का आरोप लगाया. यूक्रेनी विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने दावा किया कि रूस की सेना की ओर से जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाया गया. रूसियों का लक्ष्य अधिक से अधिक यूक्रेनियन को खत्म करना है. हमें उन्हें रोकना चाहिए और उन्हें बाहर निकालना चाहिए. मैं G-7 देशों से रूस के खिलाफ और कड़े प्रतिबंधों की मांग करता हूं.

कीव के उत्तरी बाहरी इलाके में बसे बूचा के मेयर अनातोली फेडोरुक ने शवों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि रूसी सेना ने इस शहर पर कब्जा कर लिया था. मेयर ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की टीम को लाशें दिखाई. एक लाश के हाथ सफेद कपड़े से बंधे हुए थे और मुंह में गोली मारी गई थी. फेडोरुक ने कहा कि किसी भी युद्ध में नागरिकों के लिए कुछ नियम होते हैं लेकिन रूसी सैनिकों ने जानबूझकर नागरिकों को मारा है.

फेडोरुक ने दावा किया कि रूसी सैनिकों को रूसी राष्ट्रपति पुतिन की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद वे यूक्रेन के नागरिकों को गोली मार रहे थे. उधर, मॉस्को में रूस के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को बुचा में मिले शवों के बारे में पूछे जाने पर तुरंत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. हालांकि क्रेमलिन की ओर से बाद में कहा गया कि विशेष सैन्य अभियान का उद्देश्य नागरिकों और आबादी वाले इलाकों के बजाए यूक्रेनी सेना और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना है. रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनाशेनकोव ने यूक्रेनी दावों का खंडन किया और कहा कि रूसी सेना द्वारा किसी भी नागरिक की हत्या से इनकार किया.

इससे पहले समाचार एजेंसी एएफपी ने बुका शहर के मेयर के हवाले से कहा है कि यहां एक सामूहिक कब्रगाह मिला है जहां से 280 लोगों की लाशें मिली हैं. अनातोली फेडोरुक ने समाचार एजेंसी एएफफी को फोन पर बताया कि बुका में एक सामूहिक कब्रगाह मिला है, जहां पर 280 लोगों की लाशें मिली है. 

वहीं, यूक्रेन ने शनिवार को दावा किया कि कीव के आसपास के सभी क्षेत्रों पर यूक्रेन का फिर से कब्जा हो गया है. 24 फरवरी के बाद पहली बार राजधानी कीव पर उसका पूर्ण नियंत्रण है. 

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Saturday, April 2, 2022

COVID 4th wave से पहले मिला कोरोना का नया म्युटेंट 'XE', WHO ने कहा-सबसे तेज फैल सकता है, अभी से शुरू कर दें ये 5 काम - Navbharat Times

पीएम मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की मुलाकात में क्या-क्या हुई बात - BBC हिंदी

नेपाल और भारत के प्रधानमंत्री

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भारत दौरे पर आए नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई महत्वपूर्ण नेताओं से मुलाकात हुई. साथ ही भारत और नेपाल ने शनिवार को सीमा पार रेलवे नेटवर्क समेत कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया. इस मौके पर नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने कहा कि दोनों देशों के बीच चल रहे सीमा विवाद को सुलझाने के लिए कोई साझा व्यवस्था बने.

दोनों देशों के आपसी हितों के मुद्दों पर बातचीत के बाद भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने बिहार के जयनगर से नेपाल के कुर्था तक रेल नेटवर्क का वर्चुअल मोड के जरिये उद्घाटन किया.

इसके साथ ही 90 किलोमीटर की एक पावर ट्रांसमिशन लाइन का उद्घाटन किया गया. दोनों पीएम ने नेपाल में रूपे पे-कार्ड भी लॉन्च किया.

बिजली,स्वच्छ ऊर्जा और पेट्रोलियम सप्लाई पर समझौते

भारत और नेपाल के बीच दो साल पहले सीमा विवाद को लेकर तनातनी हुई थी. लेकिन देउबा के दौरे पर इसकी छाया नहीं दिखाई पड़ी. इस मौके पर दोनों देशों ने आपसी सहयोग के लिए एक विजन डॉक्यूमेंट पेश किया.

इसके तहत बिजली क्षेत्र में सहयोग और नेपाल को पेट्रोलियम प्रोडक्ट की सप्लाई के लिए समझौते किए गए. स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग के लिए भी समझौते हुए.

मोदी और देउबा ने पत्रकारों से कहा कि दोनों के बीच बातचीत में सीमा से जुड़े सवालों पर बातचीत हुई. देउबा का कहना था कि सीमा विवाद सुलझाने के लिए दोनों देश के बीच संयुक्त व्यवस्था बने

दोनों के बीच बातचीत में मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा का अवांछित तत्वों की ओर से दुरुपयोग न होने दिया जाए.

दोनों पीएम की ओर से पत्रकारों से बातचीत के बाद भारत के विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने कहा कि दोनों देशों के बीच यही समझ बनी है कि द्विपक्षीय मुद्दों को आपसी बातचीत के जरिये जिम्मेदाराना तरीके से सुलझाया जाए. मुद्दों का राजनीतिकरण न हो.

दोनों देशों के रिश्तों में 2020 में उस वक्त तनाव दिखा था जब नेपाल ने एक ऐसा राजनीतिक नक्शा प्रकाशित किया था, जिसमें भारत के लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को उसका हिस्सा दिखाया गया

भारत-नेपाल जैसी दोस्ती की मिसाल कहीं और नहीं- प्रधानमंत्री मोदी

इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "भारत और नेपाल की दोस्ती, हमारे लोगों के आपसी सम्बन्ध, ऐसी मिसाल विश्व में कहीं और देखने को नहीं मिलती. हमारी सभ्यता, हमारी संस्कृति, हमारे आदान-प्रदान के धागे, प्राचीन काल से जुड़े हुए हैं. अनादिकाल से हम एक-दूसरे के सुख-दुःख के साथी रहे हैं."

"ऊर्जा सहयोग पर हमारा साझा विजन स्टेटमेंट भविष्य में सहयोग का ब्लूप्रिंट साबित होगा. हमने पंचेश्वर परियोजना में तेज़ गति से आगे बढ़ने के महत्व पर जोर दिया. यह प्रोजेक्ट इस क्षेत्र के विकास के लिए एक गेम चेंजर सिद्ध होगा. हमने भारतीय कंपनियों द्वारा नेपाल के पनबिजली विकास योजनाओं में और अधिक भागीदारी के विषय पर भी सहमति व्यक्त की."

"यह प्रसन्नता का विषय है कि नेपाल अपनी सरप्लस बिजली भारत को निर्यात कर रहा है. इसका नेपाल की आर्थिक प्रगति में अच्छा योगदान रहेगा. मुझे इस बात की विशेष प्रसन्नता है कि नेपाल अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का सदस्य बन गया है. इससे हमारे क्षेत्र में टिकाऊ, किफायती और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा."

"प्रधानमंत्री देउबा जी और मैंने व्यापार और सभी प्रकार से सीमापार संपर्क को प्राथमिकता देने पर भी सहमति जताई. जयनगर-कुर्था रेल लाइन की शुरुआत इसी का एक भाग है. दोनों देशों के लोगों के बीच सुगम, बाधारहित आदान-प्रदान के लिए ऐसी योजनायें बेहतरीन योगदान देंगी. नेपाल में रूपे कार्ड की शुरुआत हमारे वित्तीय संपर्क में एक नया अध्याय जोड़ेगी. अन्य प्रोजेक्ट्स जैसे नेपाल पुलिस अकादमी, नेपालगंज में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट, रामायण सर्किट आदि भी दोनों देशों को और करीब लाएंगे."

भारत और नेपाल के प्रधानमंत्री

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नेपाली नेता बोले, दोनों देशों में रोटी-बेटी का रिश्ता और मजबूत होगा

नेपाल के राजनीतिक दल लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि भारत-नेपाल के बीच पहली ब्रॉड गेज रेल सेवा की शुरुआत से दोनों पड़ोसी देशों के बीच सदियों से चला आ रहा रोटी-बेटी का रिश्ता और मजबूत होगा.

लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के नेता राकेश मिश्रा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "जयनगर-कुर्था रेल सेवा से दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध और मजबूत होंगे. इस रेल सेवा से भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता और बढ़ेगा. इससे दोनों मुल्कों के लोग और करीब आएंगे."

ये रेल सेवा बिहार के जयनगर से जनकपुर (नेपाल) के कुर्था स्टेशन को जोड़ेगी. जयनगर-कुर्था रेल खंड 68.7 किलोमीटर लंबे जयनगर-बिजलपुर-बरबीदास रेल लिंक का हिस्सा है. ये नेपाल को भारत सरकार की ओर से दी गई 8.77 अरब नेपाली रुपये की मदद से तैयार किया जा रहा है.

नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा शुक्रवार शाम से अपने तीन दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं. भारत पहुंचने के बाद वह बीजेपी मुख्यालय पहुंचे और यहां बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की.

अप्रैल 2018 में नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की भारत की आखिरी आधिकारिक यात्रा के बाद से, दोनों देशों ने अपने-अपने देश के नक्शे इस तरह से जारी किए हैं जो एक- दूसरे के लिए अस्वीकार्य हैं.

इसी तरह, भारत ने दो साल पहले धारचूला-लिपुलेक 'लिंक' सड़क का उद्घाटन किया था और हाल ही में जनवरी 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इस सड़क को 'विवादित जगह' लिपुलेख तक बढ़ाया जाएगा.

भारत और नेपाल के प्रधानमंत्री

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सीमा विवाद की बड़ी घटनाएं

अप्रैल 2020 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिपुलेख में क़रीब 5,200 मीटर रोड का उद्घाटन किया था और इसे लेकर सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा था कि लिपुलेख में भारत का सड़क बनाना उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है. नेपाल की तरफ़ से जारी इस बयान पर तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के हस्ताक्षर थे.

दोनों देशों के बीच सीमा विवाद भी बड़ा मुद्दा है. सुस्ता और कालापानी इलाक़े को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद है. छह साल पहले दोनों देशों के बीच सुस्ता और कालापानी को लेकर विदेश सचिव के स्तर की बातचीत को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन अभी तक एक भी बैठक नहीं हुई है. ओली जब भारत आए तो उन पर दबाव था कि इन दोनों मुद्दों पर बातचीत करें, लेकिन द्विपक्षीय वार्ताओं में इनका ज़िक्र नहीं हुआ.

तब से लेकर अब तक सीमा मुद्दे को हल करने के लिए राजनयिक स्तर पर पत्राचार किया गया है, लेकिन नेपाल के अधिकारियों का कहना है कि भारत ने तमाम कोशिशों को नज़रअंदाज़ कर दिया.

लेकिन नक्शे को लेकर विवाद पर भारत में नेपाल के राजदूत रहे नीलांबर आचार्य ने कहा कि अगर राजनीतिक स्तर पर समझ हो, तो अन्य प्रक्रियात्मक रास्ते खोले जा सकते हैं.

आचार्य कहते हैं, ''जब भारत अपना नक्शा लेकर आया तो हमने बातचीत के लिए कहा. भारत ने बातचीत से इनकार नहीं किया लेकिन बातचीत हुई भी नहीं. इसके बाद ही हमने अपना नक्शा जारी किया.''

"भारत अभी भी वहां सड़कों का निर्माण कर रहा है. यह एक ऐसा मामला है जिस पर बात करने की आवश्यकता है."

नेपाल, लिपुलेख

2014 में मोदी का नेपाल दौरा

जब साल 2014 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेपाली प्रधानमंत्री सुशील कोइराला के निमंत्रण पर काठमांडू आए थे, तो दोनों नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा गया था कि नेपाल और भारत के बीच सीमा मुद्दे को "हमेशा के लिए" सुलझा लिया जाएगा.

एक अलग बयान में, विदेश सचिवों को दोनों देशों के बीच कालापानी के तीन गांवों और सुस्ता सहित अन्य विवादास्पद मुद्दों पर सीमा कार्य बल के साथ काम करने के लिए कहा गया था. लेकिन दोनों देशों के विदेश सचिव बातचीत नहीं कर सके.

पूर्व राजदूत आचार्य कहते हैं, ''राजनीतिक इच्छाशक्ति होगी तो काम होंगे, यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं है तो विदेश सचिवों की ज़िम्मेदारी तय करने से कुछ नहीं होगा. इसलिए शीर्ष स्तर के नेता की यात्रा का अपना महत्व है.''

नेपाल-भारत

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नेपाल और भारत के बीच 1,800 किलोमीटर लंबी सीमा के लगभग 98 प्रतिशत हिस्से पर कोई विवाद नहीं है.

हालाँकि, समय-समय पर विदेश मंत्रियों के नेतृत्व वाले द्विपक्षीय बातचीत में सुस्ता और कालापानी के मुद्दों का उल्लेख किया जाता रहा है, लेकिन साल 2014 में प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद जारी संयुक्त बयान में इसका ज़िक्र नहीं किया गया.

सीमा विशेषज्ञ बुधिनारायण श्रेष्ठ कहते हैं, ''अगर हमारे प्रधानमंत्री इस बार 2014 में शामिल बिंदुओं पर सक्रिय बात करते हैं तो इसे सीमा विवाद के समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा.''

नेपाल पीएम

आचार्य कहते हैं कि उन्होंने सुगौली संधि और काली नदी के तीन उद्गम स्थल सहित सीमा मुद्दे का उल्लेख भारत से किया था.

सुगौली संधि के तहत मिथिला क्षेत्र का एक हिस्सा भारत से अलग होकर नेपाल के अधिकार क्षेत्र में चला गया था.

सीमा मुद्दे को हल करने के लिए उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर, संयुक्त राष्ट्र या अंतरराष्ट्रीय न्यायालय सहित तीसरे पक्ष की मध्यस्थता वैकल्पिक हो सकती है, लेकिन द्विपक्षीय संवाद का कोई अन्य विश्वसनीय और स्थायी विकल्प नहीं है.

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Gujarat AAP Roadshow: अरविंद केजरीवाल के रोड शो पर जीतू वाघानी का तंज, कहा- 'गुजरात में पर्यटक - ABP न्यूज़

Arvind Kejriwal in Gujarat: आम आदमी पार्टी के संयोजक के साथ-साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अहमदाबाद में रोड शो किया. अरविंद केजरीवाल के रोड शो की शुरुआत निकोल से हुई. इस बारे में आम आदमी पार्टी ने लिखा, ''गुजरात में बदलाव का झटका''. इस बीच गुजरात के शिक्षा मंत्री जीतू वाघनी ने केजरीवाल पर तंज कसा है.

'गुजरात में पर्यटक आते हैं और चले जाते हैं'

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान गुजरात के दो दिन के दौरे पर हैं और उन्होंने अहमदाबाद में रोड शो किया, वहीं आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि अरविंद केजरीवाल के रोड शो में पूरे गुजरात से आप कार्यकर्ता उमड़ पड़े हैं.

Gujarat HC: गुजरात HC ने अमेरिका में पिता को 2 महीने के लिए बच्चे की कस्टडी दी, जानिए- क्या है मामला?

ऐसे में अब गुजरात के शिक्षा मंत्री जीतू वाघानी ने केजरीवाल पर तंज कसते हुए कहा कि कि गुजरात हर मेहमान का स्वागत करता है. यह तय है कि गुजरात की जनता भारतीय जनता पार्टी को पसंद करेगी. गुजरात में पर्यटक आते हैं और चले जाते हैं. एक बड़े शहर का मेयर था जो गुजरात आया था.

'जीतू वाघानी निचले स्तर की राजनीति कर रहे'

जीतू वाघानी  के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आप नेता इसुदान गढ़वी ने कहा जीतू वाघानी निचले स्तर की राजनीति कर रहे हैं. मनुष्य को अपनी गरिमा और दूसरों की गरिमा को भी बनाए रखना चाहिए. किसी को नीचा दिखाना गुजरात की संस्कृति नहीं है. यह न केवल अरविंद केजरीवाल का अपमान है बल्कि गुजरात के लोगों का भी अपमान है.

Gujarat News: कांग्रेस नेता शशि थरूर ट्वीट कर बोले- 'गुजरात का कहना है कि कोरोना से 10,094 मौतें हुई लेकिन 68,370 दावों को मंज़ूरी दी गई'

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Friday, April 1, 2022

Petrol, Diesel Price Today : आज और ऊपर चढ़ा पेट्रोल-डीजल का रेट, 12 दिनों में 10वीं बार बढ़े दाम - NDTV India

नई दिल्ली:

पेट्रोल-डीजल के दामों में आज शनिवार यानी 2 अप्रैल, 2022 को फिर बढ़ोतरी हुई है. आज भी सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने ईंधन तेल के दामों में 80-80 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है. पिछले 12 दिनों में यह 10वीं बढ़ोतरी है और इतनी वृद्धि के बाद तेल के दाम अब तक एक लीटर पर 7.20 रुपये बढ़ चुका है. यानी कि इन 12 दिनों में आपको एक लीटर पेट्रोल या डीजल पर 7.20 रुपये ज्यादा देना पड़ेगा. शुक्रवार को तेल के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ था. हालांकि, उसके पहले के दो-तीन दिन तेल में 80-80 पैसों की बढ़ोतरी की गई थी.

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दो सालों में ब्रेंट में सबसे बड़ी वीकली गिरावट

बता दें कि आज की बढ़ोतरी तब आई है, जब शुक्रवार को ग्लोबल बाजार में ब्रेंट क्रूड के दामों में एक हफ्ते में पिछले 2 सालों की बड़ी गिरावट देखी गई. सत्र में एक बार ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क 102.37 डॉलर पर आ गया था, यह बंद हुआ 0.3 फीसदी की गिरावट के साथ 104.39 डॉलर प्रति बैरल पर. पिछले एक हफ्ते में ब्रेंट क्रूड में 13% की गिरावट देखी गई, जो कि अप्रैल, 2020 के बाद इसकी सबसे बड़ी गिरावट है. 

हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते तेल ने जैसी रिकॉर्ड ऊंचाई देखी है, उसकी भरपाई के चलते घरेलू बाजार में अभी राहत मिलने की कोई संभावना नहीं है. वैसे भी कई सारे मार्केट एनालिटिक रिसर्च में पहले ही कहा गया है कि जितने दाम बढ़े हैं, उनके हिसाब से भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों में 9 से 12 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है.

ये भी पढ़ें : आम आदमी पर एक और मार, CNG और PNG की कीमतों में भी हुई बढ़ोतरी

Petrol-Diesel Price Today in Metro Cities :

आज की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल 102 रुपये और मुंबई में 117 रुपये के पार चला गया है. दिल्ली में आज पेट्रोल का रेट 102.61 रुपये और डीजल का रेट 93.87 रुपये प्रति लीटर है. मुंबई में एक लीटर तेल 117.57 रुपये पर वहीं, डीजल 101.79 रुपये प्रति लीटर पर खरीदा जा सकेगा.

शहर पेट्रोल डीज़ल
दिल्ली 102.61 93.87
कोलकाता 112.19 97.02
मुंबई 117.57 101.79
चेन्नई 108.21 98.28
स्रोत : इंडियन ऑयल

चेक कर लीजिए अपने शहर में तेल के दाम देश में अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल बाजार के दामों के मुताबिक हर रोज ईंधन तेल के घरेलू दाम संशोधित होते हैं. ये नए दाम हर रोज सुबह 6 बजे लागू हो जाते हैं. आप घर बैठे भी ईंधन की कीमत का पता कर सकते हैं. घर बैठे तेल की कीमत पता करने के लिए आपको इंडियन ऑयल मैसेज सेवा के तहत मोबाइल नंबर 9224992249 पर SMS भेजना होगा. आपका मैसेज होगा 'RSP-पेट्रोल पंप का कोड'. ये कोड आपको इंडियन ऑयल के इस पेज से https://ift.tt/CVZv2Rz मिल जाएगी.

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रूसी विदेश मंत्री से मिले PM मोदी: प्रधानमंत्री ने हिंसा खत्‍म करने की अपील की; पश्चिमी देशों के दबाव के बा... - Dainik Bhaskar

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  • PM Calls For An End To Violence; Despite Pressure From Western Countries, The Talk Lasted 40 Minutes

नई दिल्लीएक घंटा पहले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार शाम रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। PMO की ओर से जारी बयान के मुताबिक, लावरोव ने उन्हें यूक्रेन में चल रही शांति वार्ता सहित वहां के हालात के बारे में जानकारी दी। वहीं, PM मोदी ने हिंसा खत्म करने की अपील को दोहराया और कहा कि भारत शांति प्रयासों में किसी भी तरह से योगदान करने के लिए तैयार है।

रूसी हमले के खिलाफ स्टैंड लेने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच प्रधानमंत्री और लावरोव की मुलाकात करीब 40 मिनट चली। यह मुलाकात इसलिए भी अहम हो जाती है, क्योंकि हाल ही में ब्रिटेन, चीन, ऑस्ट्रिया, ग्रीस और मेक्सिको सहित 12 देशों के मंत्री और सलाहकार भारत दौरे पर आ चुके हैं, लेकिन मोदी की मुलाकात का कार्यक्रम रूस के विदेश मंत्री और जापान, नेपाल के प्रधानमंत्री के साथ ही रहा।

आगे बढ़ने से पहले आप नीचे दिए पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दे सकते हैं...

रूस-यूक्रेन जंग में भारत की भूमिका अहम

इस मुलाकात के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद थे।

इस मुलाकात के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद थे।

माना जा रहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच भारत मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। खुद सर्गेई ने PM से मुलाकात से पहले इस सवाल के जवाब में भारत की भूमिका को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। सर्गेई ने मीडिया से कहा- भारत एक महत्वपूर्ण देश है। अगर भारत ऐसी भूमिका निभा सकता है जिसमें वो तार्किक रहते हुए अंतरराष्ट्रीय मसलों को सुलझाने के सुझाव दे सके तो हमें भारत की यह भूमिका मंजूर होगी।

दो दिन पहले ही यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने भी जंग रोकने के लिए भारत को रूस के साथ अपने प्रभाव का उपयोग करने की बात कही थी। कुलेबा ने कहा- अगर PM मोदी उस भूमिका को निभाने के इच्छुक हैं, तो हम उनके प्रयासों का स्वागत करेंगे।

रुपया-रूबल पेमेंट सिस्टम पर बनेगी बात
रूसी मंत्री का यह दौरा उस समय हो रहा है, जब रूसी तेल के इंपोर्ट को लेकर पश्चिमा देश भारत पर दबाव बना रहे हैं। माना जा रहा है कि भारत रूस से किफायती दरों पर भारी मात्रा में क्रूड ऑयल खरीद सकता है। वहीं, दोनों देशों के बीच बायलैटरल ट्रेड के लिए रुपया-रूबल पेमेंट सिस्टम पर सहमति बन सकती है।

अमेरिका बोला- रूस पर अपनी निर्भरता कम करे भारत
अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (डिप्टी NSA) दलीप सिंह ने अपने भारत यात्रा के दौरान एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा- कोई भी इस बात पर भरोसा नहीं करेगा कि अगर चीन LAC का उल्लंघन करता है तो रूस भारत की मदद के लिए दौड़ता हुआ आएगा। दलीप ने कहा कि भारत की रूस से ऊर्जा खरीदी फिलहाल अमेरिकी प्रतिबंध का उल्लंघन नहीं है, लेकिन हम चाहते हैं कि भारत रूस पर अपनी निर्भरता कम करे। (यहां पढ़ें पूरी खबर)

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