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Wednesday, May 26, 2021

सुप्रीम कोर्ट: जज ने किया पीड़िता से सवाल- आखिर रात आठ बजे होटल के कमरे में मिलने क्यों गईं - अमर उजाला - Amar Ujala

राजीव सिन्हा, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 27 May 2021 02:40 AM IST

सार

पीठ ने पूछा कि शिकायतकर्ता चाय पीने के लिए होटल के कमरे में क्यों गई। वह रेस्तरां या किसी अन्य सार्वजनिक स्थल पर जा सकती थी।

सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी सेना के एक जवान को यह कहते हुए गिरफ्तारी से राहत दे दी कि आखिर पीड़िता रात आठ बजे आरोपी से मिलने होटल के कमरे में क्यों गई? यह जवान अभी जम्मू-कश्मीर में तैनात है।
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जस्टिस विनीत शरण और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने आरोपी जवान द्वारा दायर अग्रिम जमानत की याचिका पर सुनवाई करते हुए पाया कि आरोपी और शिकायकर्ता के बीच पहले से संबंध थे। पीठ ने पीड़िता के वकील से सवाल किया कि रात के आठ बजे पीड़िता आरोपी से मिलने होटल के कमरे में क्यों गई?

इस पर वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता और आरोपी पहले से एक-दूसरे से परिचित थे। उन्होंने दावा किया कि होटल में चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर उसे पिलाया गया और इसके बाद दुष्कर्म किया। आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए यह भी कहा कि उसने शादी का झांसा देकर युवती के साथ संबंध बनाए।

जवान की ओर से पेश वकील सुमित सिन्हा ने कहा कि याचिकाकर्ता और पीड़िता के बीच संबंध, दोनों की मर्जी से बनाए गए थे। दोनों, एक-दूसरे को 2017 से जानते थे। याचिकाकर्ता का कहना था कि उनके रिश्ते में तब खटास आ गई, जब लड़की के माता-पिता शादी को लेकर मिले थे।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने एफआईआर दर्ज कर उस पर दुष्कर्म का आरोप लगा दिया। याचिकाकर्ता के वकील सिन्हा ने यह भी कहा कि इस मामले में चार्जशीट दायर होने तक वह जमानत पर था और अब ट्रायल शुरू हो चुका है इसलिए उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का कोई मतलब नहीं है।


आगरा में दर्ज मामले में आरोपी को गिरफ्तारी से राहत
सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर गौर करने के बाद आगरा के एक थाने में दर्ज इस मामले में जवान को गिरफ्तारी से राहत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए यूपी सरकार और शिकायतकर्ता युवती को नोटिस जारी कर छह हफ्ते में जवाब दोने को कहा है।

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी जवान को तीन महीने के लिए राहत देते हुए कहा था कि गिरफ्तारी से राहत तीन महीने के बाद नहीं बढ़ाई जाएगी। हाईकोर्ट के इस आदेश को जवान ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

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