Rechercher dans ce blog

Thursday, June 10, 2021

कुरुक्षेत्र: कांग्रेस और योगी आदित्यनाथ दोनों पर पड़ी भाजपा के 'ऑपरेशन जितिन' की दोहरी मार - अमर उजाला - Amar Ujala

चुनावी मौसम में सियासी दलों में नेताओं का इधर से उधर होना कोई नई बात नहीं है। लेकिन 2014 लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद जिस तरह उन दिग्गज नेताओं का कांग्रेस से बाहर जाना हुआ जिन्हें अपने अपने राज्यों और इलाकों में कांग्रेस का पर्याय और चेहरा माना जाता था। इनमें कई नाम ऐसे हैं जो नेहरू गांधी परिवार के वफादारों में गिने जाते थे। हरियाणा में वीरेंद्र सिंह, अशोक तंवर, रणजीत सिंह, कर्नाटक में एसएम कृष्णा, असम में हेमंत विश्वसर्मा, उत्तराखंड में विजय बहुगुणा, सतपाल महाराज, मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक, महाराष्ट्र में नारायण राणे, प्रियंका चतुर्वेदी, विखे पाटिल, कर्नाटक में रोशन बेग, गुजरात में शंकर सिंह बाघेला, अल्पेश ठाकोर, केरल में टॉम वडक्कन जैसे कई नेता शामिल हैं।

इनके अलावा कई जाने माने नेता ऐसे हैं जिन्हें नेतृत्व ने अकारण घर बिठा दिया है या घर बैठने को मजबूर कर दिया। वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी हों या नेहरू गांधी परिवार के वफादार सुरेश पचौरी या बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से पार्टी संगठन में सचिव पद तक पहुंचे जमीनी नेता हरिकेश बहादुर हों या कभी संजय गांधी और राजीव गांधी की टीम के और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण सिंह मुन्ना हो या फिर पार्टी छोड़ने को मजबूर कर दिए गए पूर्व महासचिव सत्यव्रत चतुर्वेदी, पार्टी इन्हें करीब-करीब भूल चुकी है और इनकी योग्यता, क्षमता और अनुभव का कोई लाभ नहीं ले रही है।

अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो प्रियंका गांधी के कार्यभार संभालने और लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद अजय कुमार लल्लू को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया तो उनकी नियुक्ति को लेकर महज एक बैठक करने वाले रामकृष्ण द्विवेदी, सत्यदेव त्रिपाठी, भूधर नारायण मिश्र, डा. संतोष कुमार सिंह, नेकचंद पांडे जैसे करीब एक दर्जन से ज्यादा उन पुराने निष्ठावान कांग्रेसियों को पार्टी से बाहर कर दिया गया जो लगातार प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में लाने की वकालत करते नहीं थकते थे। काफी समझाने बुझाने के बाद किसी तरह बुजुर्ग रामकृष्ण द्विवेदी की पार्टी में वापसी तो हो गई लेकिन उसके कुछ ही समय बाद उनका निधन हो गया। बाकी नेता आज भी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की वापसी का सपना संजोए पार्टी से बाहर बैठे हैं।

जो कांग्रेस छोड़कर जा चुके हैं, उनके अलावा कई ऐसे भी हैं जो मौके की तलाश में हैं या अभी असमंजस में हैं। सचिन पायलट हालांकि बार-बार यह कहते रहे हैं कि वह भाजपा में नहीं जाएंगे, लेकिन जब वह अपनी बगावत खत्म करके वापस आए थे तब उनसे जो वादे नेतृत्व ने किए थे उनमें से एक भी अभी तक पूरा न होने की वजह से उनके और उनके समर्थकों के मन में भी क्षोभ है और यह क्षोभ कब विद्रोह में बदल जाए कोई नहीं बता सकता। मिलिंद देवड़ा, संजय निरूपम, संजय झा, संदीप दीक्षित जैसे कई नाम इस श्रेणी के हैं।

Adblock test (Why?)


कुरुक्षेत्र: कांग्रेस और योगी आदित्यनाथ दोनों पर पड़ी भाजपा के 'ऑपरेशन जितिन' की दोहरी मार - अमर उजाला - Amar Ujala
Read More

No comments:

Post a Comment

'हां, ये सही है लेकिन क्या मुल्क में यही चलता रहेगा...', ASI रिपोर्ट पर बोले प्रोफेसर इरफान हबीब - Aaj Tak

ज्ञानवापी परिसर की ASI सर्वे रिपोर्ट को लेकर हिंदू पक्ष ने कई दावे किए हैं. गुरुवार को वकील विष्णु शंकर जैन ने रिपोर्ट सार्वजनिक की. उन्हों...