
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Thu, 18 Nov 2021 11:08 AM IST
सार
उपराज्यपाल ने हैदरपोरा मुठभेड़ की जांच के आदेश दे दिए हैं। इसकी जांच एडीएम रैंक के अधिकारी करेंगे। इससे पहले मुठभेड़ में मारे गए लोगों के परिजनों ने श्रीनगर में प्रदर्शन कर शव सौंपने की मांग उठाई। प्रशासन ने रामबन में एहतियातन धारा 144 लागू कर दी है।श्रीनगर में प्रदर्शन करते हैदरपोरा में मारे गए नागरिकों के परिजन। - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
A magisterial inquiry by officer of ADM rank has been ordered in Hyderpora encounter.Govt will take suitable action as soon as report is submitted in a time-bound manner.JK admin reiterates commitment of protecting lives of innocent civilians&it will ensure there is no injustice.
— Office of LG J&K (@OfficeOfLGJandK) November 18, 2021
दिन में प्रदर्शन के बाद शाम को कैंडिल मार्च निकाला और रात को प्रदर्शनकारी धरने पर बैठ गए। पुलिस ने देर रात प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। वहीं मुठभेड़ में मारे गए रामबन के निवासी के गांव व आसपास के इलाकों में प्रशासन ने एहतियातन धारा 144 लागू कर दी है। बुधवार को श्रीनगर प्रेस एन्क्लेव में विरोध प्रदर्शन में परिवार वालों ने आरोप लगाया कि मारे गए नागरिक आतंकी या उनके मददगार नहीं थे। अल्ताफ भट के भाई अब्दुल मजीद ने कहा कि एक नंबरदार (राजस्व अधिकारी) के रूप में, वह लगातार पुलिस के संपर्क में रहता है और अगर उसका भाई आतंकवाद में शामिल होता तो वे उसे सूचित करते। उन्होंने एलजी से आग्रह किया कि वह घटना की जांच कराएं अगर मेरा भाई दोषी है तो मैं हर सजा के लिए तैयार हूं।
संगलदान और मोहम्मद आमिर के गांव के आसपास धारा 144 लागू की
वहीं, रामबन में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने संगलदान और मोहम्मद आमिर के गांव के आसपास धारा 144 लागू कर दी है। क्षेत्र में पांच से उससे अधिक लोगों के एकत्रित होने पर पाबंदी रहेगी। श्रीनगर में अल्ताफ भट के भाई अब्दुल मजीद ने कहा कि एक नंबरदार (राजस्व अधिकारी) के रूप में, वह लगातार पुलिस के संपर्क में रहता है और अगर उसका भाई आतंकवाद में शामिल होता तो वे उसे सूचित करते। अल्ताफ पिछले 30 साल से हैदरपोरा बाईपास में कारोबार कर रहा था।
किरायेदारों का सत्यापन पुलिस स्टेशन में करवाया गया था
उन्होंने भवन किराए पर दिया और हमने उनका (किरायेदारों का) सत्यापन पुलिस स्टेशन सदर में प्रस्तुत किया था। उन्होंने कहा कि अगर कुछ गलत होता तो पुलिस को हमसे संपर्क करना चाहिए था। मजीद ने कहा कि घटना वाले दिन टास्क फोर्स के लोग उसके भाई को इमारत में तलाशी के लिए तीन बार ले गए। इसी दौरान वह गोलियों का शिकार हो गया। उन्होंने एलजी से आग्रह किया कि वह घटना की जांच कराएं अगर मेरा भाई दोषी है तो मैं हर सजा के लिए तैयार हूं।
मेरा पति आतंकी नहीं डॉक्टर था: हुमैरा गुल
मुठभेड़ में मारे गए मुदासिर गुल की पत्नी हुमैरा गुल ने कहा कि उनकी दो साल की बेटी बाबा बाबा पुकारकर रो रही है और उनके पास कोई जवाब नहीं है। पुलिस को इस बात का सबूत देना होगा कि उसका पति एक ओजीडब्ल्यू था। एलजी मनोज सिन्हा से आग्रह है कि मेरी बेटी को आखिरी बार उसके पिता को देखने की अनुमति दें। मेरे पति ओजीडब्ल्यू नहीं बल्कि पेशे से डॉक्टर थे।
आमिर के पिता ने डेढ़ दशक पूर्व आतंकी को किया था ढेर
मुठभेड़ में मारे गए आमिर के पिता लतीफ मागरे ने पंद्रह वर्ष पूर्व निहत्थे होने के बावजूद एक आतंकी को मार डाला था। मागरे ने कहा कि यदि सुरक्षा बलों के पास बेटे के खिलाफ सुबूत हैं तो उन्हें भी दिखाए जाएं, लेकिन वे जानते हैं कि उनका बेटा निर्दोष था। वह इंसाफ के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे। उप राज्यपाल उन्हें इंसाफ दिलाएं और बेटे का शव सुपुर्द-ए-खाक के लिए उन्हें सौंपा जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी होने का उन्हें ये सिला मिला है।
क्या कहती है पुलिस
इसके विपरीत पुलिस का दावा है कि हैदरपोरा में चार लोग मारे गए। जिसमें एक पाकिस्तानी आतंकवादी बिलाल और उसके स्थानीय सहयोगी मोहम्मद आमिर के साथ दो नागरिक अल्ताफ भट और मुदासिर गुल शामिल हैं। अल्ताफ उस मकान का मालिक है जिसमें अवैध रूप से काल सेंटर चलाया जा रहा था। जो दरअसल एक आतंकी ठिकाना था। इसके अलावा मुदासिर उस कॉल सेंटर का संचालक था। उसने ही रविवार को डाउन टाउन हमले के बाद अपनी कार में पाकिस्तानी आतंकी को पनाहगाह तक पहुंचाया था।
नेकां अध्यक्ष ने की निष्पक्ष जांच की मांग
नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष डॉ. फारुक अब्दुल्ला ने उप राज्यपाल मनोज सिन्हा से आग्रह किया है कि वह हैदरपोरा मुठभेड़ में मारे गए मकान मालिक अल्ताफ व कॉल सेंटर संचालक मुदासिर के शव उनके परिजनों को दिलाने में मदद करें। इससे कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से बचेगी। एलजी ने उनकी मांगों पर गौर करने का आश्वासन दिया है। नेकां के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर बताया गया कि फारूक अब्दुल्ला ने उप राज्यपाल से बात कर घटना की निष्पक्ष जांच की भी मांग की है।
उमर ने उठाए सवाल
इस बीच, नेशनल कांफ्रेंल के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पुलिस स्वीकार करती है कि वे इमारत के मालिक (अल्ताफ) और किरायेदार (गुल) को इमारत में ले गए और दरवाजे खटखटाने के लिए उनका इस्तेमाल किया। फिर इन लोगों को आतंकवादी कैसे कहा जा सकता है।
हैदरपोरा मुठभेड़: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने दिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश, कहा- रिपोर्ट मिलते ही की जाएंगी उचित कार्रवाई, रामबन में धारा 144 लागू - अमर उजाला
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