Rechercher dans ce blog

Wednesday, November 17, 2021

यौन शोषण का विवादित केस: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा था: स्किन-टु-स्किन कॉन्टैक्ट बगैर यौन शोषण नहीं, सुप्रीम को... - दैनिक भास्कर

  • Hindi News
  • National
  • Skin To Skin Contact (Sexual Assault); Supreme Court Reverses Bombay HC Judgment

नई दिल्ली35 मिनट पहले

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि किसी नाबालिग के ब्रेस्ट को कपड़े के ऊपर से पकड़ने को यौन उत्पीड़न नहीं माना जाएगा। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच की जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला ने पोक्सो (POCSO) एक्ट का हवाला देते हुए कहा था कि इस कानून के तहत अगर स्किन-टु-स्किन कॉन्टैक्ट नहीं हुआ तो उसे सेक्शुअल हैरेसमेंट नहीं कहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस यूयू ललित, एस रविंद्र भट और बेला त्रिवेदी की बेंच ने कहा कि 'टच' के अर्थ को 'स्किन-टु-स्किन' तक सीमित करने से इस पॉक्सो कानून की बेहद संकीर्ण और बेहूदा व्याख्या निकलकर आएगी। इससे इस कानून का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा, जिसे हमने बच्चों को यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए लागू किया था।

अपने मुताबिक कानून की व्याख्या न करे कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि पहने हुए कपड़ों या किसी अन्य कपड़े के ऊपर से बच्चे को गलत नीयत से छूना भी पॉक्सो एक्ट में आता है। कोर्ट को सीधे-सरल शब्दों के गूढ़ अर्थ निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसी संकीर्ण और रूढ़िवादी व्याख्याओं से इस कानून को बनाने का उद्देश्य विफल होगा, जिसकी हम इजाजत नहीं दे सकते। 27 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई थी, जिसमें आरोपी को बरी किया गया था।

39 साल के आरोपी ने 12 साल की किशोरी से की थी छेड़खानी
मामला नागपुर का है। वहां रहने वाली 16 साल की लड़की की ओर से यह केस दायर किया गया था। घटना के समय उसकी उम्र 12 साल और आरोपी की उम्र 39 साल थी। पीड़ित के मुताबिक, दिसंबर 2016 में आरोपी सतीश उसे खाने का सामान देने के बहाने अपने घर ले गया था। उसके ब्रेस्ट को छूने और निर्वस्त्र करने की कोशिश की थी। सेशन कोर्ट ने इस मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत तीन साल और IPC की धारा 354 के तहत एक साल की सजा सुनाई थी। ये दोनों सजाएं एकसाथ चलनी थीं।

HC की महिला जज ने फैसला बदला
मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच की जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला ने 12 जनवरी को अपने आदेश में कहा था कि 12 साल की बच्ची से यौन शौषण के ऐसे सबूत नहीं मिले हैं, जिससे साबित हो सके कि उसका टॉप उतारा गया या फिर फिजिकल कॉन्टैक्ट हुआ। इसलिए इसे यौन अपराधों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
जस्टिस गनेडीवाला ने सेशन कोर्ट के फैसले में संशोधन करते हुए दोषी को पॉक्सो एक्ट के तहत दी गई सजा से बरी कर दिया था, जबकि IPC की धारा 354 के तहत सुनाई गई एक साल की कैद को बरकरार रखा था।

क्या है पॉक्सो एक्ट?
पॉक्सो एक्ट के तहत, गलत नीयत से किसी बच्चे का सीना, जननांग छूना या फिर उससे ऐसा कराना, या ऐसी हरकत करना जिसमें फिजिकल कॉन्टैक्ट होता हो, ये सभी चीजें यौन शोषण हैं।

खबरें और भी हैं...

Adblock test (Why?)


यौन शोषण का विवादित केस: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा था: स्किन-टु-स्किन कॉन्टैक्ट बगैर यौन शोषण नहीं, सुप्रीम को... - दैनिक भास्कर
Read More

No comments:

Post a Comment

'हां, ये सही है लेकिन क्या मुल्क में यही चलता रहेगा...', ASI रिपोर्ट पर बोले प्रोफेसर इरफान हबीब - Aaj Tak

ज्ञानवापी परिसर की ASI सर्वे रिपोर्ट को लेकर हिंदू पक्ष ने कई दावे किए हैं. गुरुवार को वकील विष्णु शंकर जैन ने रिपोर्ट सार्वजनिक की. उन्हों...