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Friday, September 2, 2022

जर्मनी में पायलटों की हड़ताल के चलते 800 फ्लाइट रद्द, दिल्ली में एयरपोर्ट पर फंसे यात्री - Aaj Tak

जर्मनी में पायलटों की हड़ताल का असर भारत में भी देखने को मिल रहा है. यहां दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर यात्रियों को वैकल्पिक फ्लाइट के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. दरअसल, जर्मनी में लुफ्थांसा एयरलाइंस (Lufthansa airlines) ने पायलटों की हड़ताल के चलते 800 फ्लाइट रद्द कर दीं.

एयरपोर्ट की डीसीपी तनु शर्मा ने बताया कि रात में डिपार्टर गेट नंबर-1 के सामने भीड़ जमा हो गई थी. इसकी सूचना देर रात 12 बजे के बाद मिली थी, जिसमें बताया गया था डिपार्चर गेट के सामने मैन रोड पर भीड़ जमा हो गई है.  मौके पर पहुंचने पर पता लगा कि वहां करीब 150 लोग थे और इसी वजह से ट्रैफिक की रफ्तार स्लो हो गई थी.

दिल्ली एयरपोर्ट पर मौजूद एक यात्री ने बताया कि मुझे लुफ्थांसा एयरलाइंस से जर्मनी जाना था, लेकिन फ्लाइट कैंसिल हो गई. मैंने अमीरात एयरलाइंस में टिकट बुक कर लिए हैं और अब मैं दुबई से होकर जाऊंगा, जहां मुझे 14 घंटे रुकना होगा. उसने कहा कि मुझे अभी नहीं पता कि हमें रिफंड कब मिलेगा. वहां मौजूद लोग पैसे वापस करने या टर्मिनल भवन के अंदर मौजूद अपने रिश्तेदारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग कर रहे थे.

वहां पूछने पता चला कि लुफ्थांसा एयरलाइंस की दो फ्लाइट कैंसिल हो गईं. दिल्ली से फ्रैंकफर्ट जाने वाली फ्लाई (LH 761) जो 300 यात्रियों को लेकर देर रात 2:50 बजे टेकऑफ करने वाली थी और दूसरी फ्लाइट (LH 763) जो 400 यात्रियों को लेकर दिल्ली से म्यूनिख जा रही थी, जिसकी टेकऑफ की टाइमिंग 1:10 बजे की थी.

डीसीपी ने बताया कि ये दोनों उड़ानें  लुफ्थांसा एयरलाइंस के सभी पायलटों की एक दिवसीय विश्वव्यापी हड़ताल की वजह से रद्द की गई थीं. यात्रियों के रिश्तेदार और सहयोगियों को तितर-बितर किया गया. इसके साथ ही एयरलाइंस कंपनी की ओर से यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के प्रयास किए जा रहे हैं.

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Thursday, September 1, 2022

कर्नाटक: लिंगायत मठ के संत शिवमूर्ति मुरुगा को पुलिस ने किया गिरफ्तार, नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप - Aaj Tak

स्टोरी हाइलाइट्स

  • संत का गुरुवार रात ही करवाया जाएगा मेडिकल
  • पुलिस को आरोपी की चाहिए 14 दिन की कस्टडी

कर्नाटक पुलिस ने लिंगायत मठ के संत शिवमूर्ति मुरुगा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में चित्रदुर्गा जिला जेल भेज दिया गया है. देर रात उनका मेडिकल चेकअप करवाया गया और कोर्ट में पेशी हुई. उसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया. कर्नाटक पुलिस अब ओपन कोर्ट में आरोपी संत शिवमूर्ति की रिमांड की मांग करेगी. इससे पहले शिवमूर्ति की पुलिस ने गिरफ्तार की थी. पहले उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था. शिवमूर्ति पर नाबालिगों लड़कियों के यौन शोषण का आरोप है.

बता दें कि शिवमूर्ति लिंगायत मठ काफी प्रसिद्ध मठ है. मैसूर पुलिस ने दो नाबालिगों की शिकायत के बाद संत के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. पुलिस ने POCSO एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया है. कर्नाटक पुलिस ने बताया कि आरोपी शिवमूर्ति मुरुगा का रात में ही मेडिकल टेस्ट कराया जा रहा है. उसके बाद जज के सामने पेशी होगी. शिवमूर्ति मुरुगा के अलावा पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों से पूछताछ की तैयारी है.

चित्रदुर्गा जिले के एसपी परशुराम ने बताया कि हमने पूरी प्रक्रिया का पालन किया है. अभी सिर्फ शिवमूर्ति को गिरफ्तार किया है और रश्मि को पूछताछ के लिए ले जाया गया है. उसे आज रात मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा. हम इन सभी के खिलाफ सबूत एकट्ठा कर रहे थे. मामले में अन्य आरोपियों के ठिकाने के बारे में भी जानकारी मिली है.

अपनी छवि बचाने की कोशिश में लगी है सरकार: कांग्रेस

इस मामले में कांग्रेस ने हमला बोला. विधायक प्रियंक खड़ने ट्वीट किया और कहा- POCSO का केस दर्ज हुए करीब एक सप्ताह हो गया है और सरकार न्याय देने के बजाय अपनी छवि को बचाने की कोशिश में लगी है. 

पुलिस को चाहिए 14 दिन की कस्टडी

पुलिस अब शिवमूर्ति से घटना के संबंध में पूछताछ करने वाली है. नाबालिगों के आरोप गंभीर हैं, ऐसे में पुलिस भी अब उन्हीं दलीलों के आधार पर पूछताछ करने वाली है. पुलिस मुरुगा की कम से कम 14 दिन की कस्टडी चाहती है. पहले ऐसी खबरें आई थीं कि शिवमूर्ति मुरुगा अपने मठ से भाग गए हैं, लेकिन बाद में पुलिस ने बताया कि वे कानूनी सलाह लेने के लिए अपने वकील से मिलने के लिए जा रहे थे. 

इस मामले में बड़ी बात ये है कि जिन दो नाबालिगों ने शिवमूर्ति पर यौन शोषण का आरोप लगाया है, वो दोनों ही मठ द्वारा संचालित स्कूल में ही पढ़ती हैं. ये पीड़िताएं एक एनजीओ की मदद से जिला बाल कल्याण समिति के पास शिकायत दर्ज कराने पहुंची थीं. इस मामले में शिवमूर्ति मुरुगा के अलावा चार वॉर्डन के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है. शिकायत में कहा गया है कि मठ द्वारा संचालित स्कूल के हॉस्टल में रहने वाली 15 और 16 साल की लड़कियों का लगभग साढ़े तीन साल तक यौन उत्पीड़न हुआ. इसके अलावा कई दूसरी लड़कियों के साथ भी ऐसा ही किया गया.

कोर्ट पहुंच चुका है मामला

वैसे कल शुक्रवार को कर्नाटक के चित्रदुर्गा जिले की एक स्थानीय अदालत में इस मामले की सुनवाई भी होनी है. दरअसल चित्रदुर्गा की सत्र अदालत ने मामले में दो नाबालिग पीड़िताओं के वकीलों के बीच मतभेद देखे गए थे, इसी वजह से सुनवाई को शुक्रवार तक स्थगित कर दिया गया. अभी के लिए कर्नाटक में इस मामले की वजह से स्थिति तनावपूर्ण चल रही है. कई सामाजिक संगठनों ने शिवमूर्ति मुरुगा के खिलाफ कल सुबह 10.30 बजे बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया है.

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मदरसों के सर्वे पर ओवैसी खफा: एआईएमआईएम प्रमुख ने इसे छोटा एनआरसी बताया, बोले- वे मुस्लिमों का शोषण करना चाहते - अमर उजाला

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विस्तार

उत्तर प्रदेश में गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे कराने के प्रदेश सरकार के आदेश पर एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि मदरसे संविधान के अनुच्छेद 30 के अंतर्गत हैं तो यूपी सरकार ने सर्वे कराने का आदेश क्यों दिया।

उन्होंने आगे कहा कि अनुच्छेद 30 के तहत सरकार हमारे अधिकारों में दखल नहीं दे सकती। वे मुस्लिमों का शोषण करना चाहते हैं। असदुद्दीन औवेसी ने इस सर्वे को छोटे एनआरीसी की तरह बताया है। यूपी सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि मदरसों को लेकर झूठ फैलाना बंद कर दीजिए, जब मदद नहीं देते तो मदरसों में दखल क्यों दे रहे हो।

बुधवार को आया था आदेश

इससे पहले बुधवार को प्रदेश में अब गैर सरकारी मान्यता वाले मदरसों का सर्वे कराने संबंधी आदेश जारी हुआ था। इस बाबत सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। दरअसल बाल्य संरक्षण आयोग को मिली शिकायतों के आधार पर यह सर्वे कराने का निर्णय लिया गया है। इसमें ऐसे मदरसों की संख्या, वहां उपलब्ध सुविधाएं और विद्यार्थियों का ब्योरा जुटाया जाएगा।

उप्र मदरसा शिक्षा परिषद के रजिस्ट्रार जगमोहन सिंह के मुताबिक शासन ने आदेश जारी किया है कि राज्य के अनुदानित मदरसों के शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का अब आपसी सहमति से तबादला हो सकेगा। इसके लिए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी द्वारा अपनी संस्तुति सहित आवेदन को दो माह के भीतर रजिस्ट्रार मदरसा बोर्ड को प्रस्ताव भेजना होगा।


रजिस्ट्रार एक माह के भीतर परीक्षण कर इस पर निर्णय लेंगे। इसके अलावा अगर कहीं प्रबंध समिति विवादित है तो वहां मृतक आश्रित की नियुक्ति के आदेश जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी व प्रधानाचार्य के माध्यम से जारी हो सकेंगे। इसे समिति विवाद की स्थिति में रोका नहीं जाएगा।

वहीं अनुदानित मदरसों में कार्यरत शिक्षिकाओं व अन्य महिला कर्मचारियों के लिए भी अच्छी खबर है। अब अन्य विभागों की तरह ही उन्हें भी अब छह महीने का मातृत्व अवकाश मिल सकेगा। इसके अलावा बाल देखभाल के लिए दो साल की छुट्टी भी मिल सकेगी। शासन ने संबंधित आदेश जारी कर दिया है।

यूपी के अल्पसंख्यक मंत्री दानिश अंसारी ने एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी पर हमला बोलते हुए कहा कि ओवैसी साहब हमेशा गुमराह करने वाली राजनीति करते हैं। लेकिन आज के मुसलमान अच्छी तरह से वाकिफ हैं, वे जानते हैं कि उनके विकास के लिए क्या अच्छा है और उन्हें योगी सरकार पर भरोसा है। 

एनसीपीसीआर अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि ओवैसी सर झूठ बोल रहे हैं। अल्पसंख्यकों को गुमराह कर रहे हैं। युवाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। अनुच्छेद 30 का तर्क लागू नहीं होगा, क्योंकि सरकार उन बच्चों के अधिकारों की संरक्षक है जो स्कूल से बाहर हैं। स्कूल न जाने वाले बच्चों का डेटा जानने के लिए हमें मदरसों के पास जाना होगा। सरकार को बच्चों की स्थिति के बारे में पूछने और उन्हें शिक्षा प्रणाली में फिर से शामिल करने का पूरा अधिकार है। हमारी रिपोर्ट से पता चलता है कि 1.10 करोड़ से अधिक बच्चे गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ रहे हैं।

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मदरसों के सर्वे पर ओवैसी खफा: एआईएमआईएम प्रमुख ने इसे छोटा एनआरसी बताया, बोले- वे मुस्लिमों का शोषण करना चाहते - अमर उजाला
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भारत के समुद्री इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा जंगी जहाज, 20000 करोड़ में बनकर हुआ तैयार, जानें 'INS VIKRANT... - India TV हिंदी

INS Vikrant Largest Warship India- India TV Hindi News
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Highlights

  • भारतीय नौसेना में शामिल होगा आईएनएस विक्रांत
  • पीएम मोदी केरल में देश को सौंपेंगे सबसे बड़ा जहाज
  • भारत के समुद्री इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा जहाज है

INS Vikrant: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत यानी जंगी जहाज ‘आईएनएस विक्रांत’ नौसेना को सौंपेंगे। यह भारत के समुद्री इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा जहाज है। पीएम मोदी कोचीन शिपयार्ड में 20,000 करोड़ रुपये की लागत से बने स्वदेशी अत्याधुनिक स्वचालित यंत्रों से युक्त विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत का जलावतरण करेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ‘नए नौसैनिक ध्वज (निशान) का भी अनावरण करेंगे, जो औपनिवेशिक अतीत को पीछे छोड़ते हुए समृद्ध भारतीय समुद्री विरासत के अनुरूप होगा।’ भारतीय नौसेना के वाइस चीफ वाइस एडमिरल एस एन घोरमडे ने इससे पहले कहा था कि आईएनएस विक्रांत हिंद प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में योगदान देगा।

उन्होंने कहा कि आईएनएस विक्रांत पर विमान उतारने का परीक्षण नवंबर में शुरू होगा, जो 2023 के मध्य तक पूरा हो जाएगा। मिग-29 के जेट विमान पहले कुछ वर्षों के लिए युद्धपोत से संचालित होंगे। आईएनएस विक्रांत का सेवा में आना रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। विक्रांत के सेवा में आने से भारत अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन और फ्रांस जैसे उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा, जिनके पास स्वदेशी रूप से डिजाइन करने और एक विमान वाहक बनाने की क्षमता है, जो भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल का एक वास्तविक प्रमाण होगा। युद्धपोत का निर्माण, भारत के प्रमुख औद्योगिक घरानों के साथ-साथ 100 से अधिक लघु, कुटीर एवं मध्यम उपक्रम (एमएसएमई) द्वारा आपूर्ति किए गए स्वदेशी उपकरणों और मशीनरी का उपयोग करके किया गया है। 

जंगी जहाज का नाम विक्रांत क्यों रखा गया?

विक्रांत के साथ ही भारत के पास सेवा में मौजूद दो विमानवाहक जहाज होंगे, जो देश की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेंगे। भारतीय नौसेना के संगठन, युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो (डब्ल्यूडीबी) द्वारा डिजाइन किया गया और बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित इस स्वदेशी विमान वाहक का नाम उसके शानदार पूर्ववर्ती भारत के पहले विमानवाहक के ‘विक्रांत’ के नाम पर रखा गया है, जिसने 1971 के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। विक्रांत का अर्थ विजयी और वीर होता है। स्वदेशी विमानवाहक (आईएसी) की नींव अप्रैल 2005 में औपचारिक स्टील कटिंग द्वारा रखी गई थी। विमान वाहक बनाने के लिए खास तरह के स्टील की जरूरत होती है, जिसे वॉरशिप ग्रेड स्टील (डब्ल्यूजीएस) कहते हैं। 

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स्वदेशीकरण अभियान को आगे बढ़ाते हुए आईएसी के निर्माण के लिए आवश्यक वॉरशिप ग्रेड स्टील को रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल) और भारतीय नौसेना के सहयोग से स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के माध्यम से सफलतापूर्वक देश में बनाया गया था। इसके बाद जहाज के खोल (ढांचा निर्माण) का काम आगे बढ़ा और फरवरी 2009 में जहाज के पठाण (नौतल, कील) का निर्माण शुरू हुआ यानी युद्धपोत के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी। पठाण, जहाज का सबसे नीचे रहने वाला बुनियादी अवयव है, जिसके सहारे समस्त ढांचा खड़ा किया जाता है। जहाज निर्माण का पहला चरण अगस्त 2013 में जहाज के सफल प्रक्षेपण के साथ पूरा हुआ। 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा आईएनएस विक्रांत 18 समुद्री मील से लेकर 7500 समुद्री मील की दूरी तय कर सकता है। 

जहाज में लगभग 2,200 कक्ष हैं, जिन्हें चालक दल के लगभग 1,600 सदस्यों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें महिला अधिकारियों और नाविकों को समायोजित करने के लिए विशेष केबिन शामिल हैं। मशीनरी संचालन, जहाज नौवहन और उत्तरजीविता के लिए बहुत उच्च स्तर के स्वचालन के साथ डिजाइन किया गया यह विमानवाहक, अत्याधुनिक उपकरणों और प्रणालियों से लैस है। जहाज में नवीनतम चिकित्सा उपकरण सुविधाओं के साथ एक पूर्ण अत्याधुनिक चिकित्सा परिसर है, जिसमें प्रमुख मॉड्यूलर ओटी (ऑपरेशन थिएटर), आपातकालीन मॉड्यूलर ओटी, फिजियोथेरेपी क्लिनिक, आईसीयू, प्रयोगशालाएं, सीटी स्कैनर, एक्स-रे मशीन, दंत चिकित्सा परिसर, आइसोलेशन वार्ड और टेलीमेडिसिन सुविधाएं शामिल हैं। यह स्वदेश निर्मित उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) और हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) के अलावा मिग-29 के लड़ाकू जेट, कामोव-31 और एमएच-60 आर बहु-भूमिका वाले हेलीकॉप्टरों सहित 30 विमानों से युक्त एयर विंग को संचालित करने में सक्षम होगा। 

भारतीय नौसेना के नाम के पीछे क्या है कहानी?

भारतीय नौसेना की वेबसाइट पर उपलब्ध सूचना के मुताबिक, दो अक्टूबर 1934 को नौसेना का नया नामकरण ‘रॉयल इंडियन नेवी’ के रूप में किया गया था, जिसका मुख्यालय बंबई (मौजूदा मुंबई) में बनाया गया था। आजादी के बाद देश का विभाजन होने पर रॉयल इंडियन नेवी को रॉयल इंडियन नेवी और रॉयल पाकिस्तान नेवी के रूप में विभाजित कर दिया गया। भारत के 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र घोषित होने पर ‘रॉयल’ शब्द को हटा दिया गया और इसकी जगह ‘इंडियन नेवी’ (भारतीय नौसेना) शब्दावली अपनाई गई। नौसेना का मौजूदा डिजाइन एक सफेद ध्वज है, जिस पर क्षैतिज और लंबवत रूप में लाल रंग की दो पट्टियां हैं। साथ ही, भारत का राष्ट्रीय चिह्न (अशोक स्तंभ) दोनों पट्टियों के मिलन बिंदु पर अंकित है। पीएमओ के बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री विशेष रूप से सामरिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता के प्रबल समर्थक हैं। 

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विक्रांत को दो सितंबर को नौसेना की सेवा में शामिल करने के लिए शुक्रवार को इसके चालक दल के 1600 सदस्यों और अन्य कर्मियों ने कड़ी मेहनत की। युद्धपोत को नौसेना में शामिल करने के लिए होने वाले हाईप्रोफाइल कार्यक्रम से पहले इसकी पेंटिंग और सफाई कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिस्सा लेंगे। इस पोत का वजन 45,000 टन है। इसे यहां कोचिन शिपयार्ड लिमिटेड में रखा गया है, जहां इसे निर्मित किया गया है। पूरे क्षेत्र में 2,000 से अधिक असैन्य कर्मी और नौसेना कर्मी जोर-शोर से अंतिम क्षणों की तैयारियों में जुटे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देने के लिए नौसेना के 100 सदस्यों की एक टीम अपने बैंड के साथ अभ्यास करते देखी गई है। 

जहाज के अंदर कौन सी सुविधाएं हैं मौजूद? 

स्वदेशी विमानवाहक पोत के एयरोस्पेस मेडिसीन विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट कमांडर वंजारिया हर्ष ने बताया कि इस पर तीन महीने के लिए दवाइयां और सर्जरी में उपयोग आने वाले उपकरण सदा उपलब्ध होंगे। पोत पर तीन रसोई होंगी, जो इसके चालक दल के 1,600 सदस्यों के भोजन की जरूरतों को पूरा करेंगी। इस पोत का डिजाइन नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है और इसका निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की शिपयार्ड कोचिन शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है। पोत 262 मीटर लंबा और 62 मीटर चौड़ा है और इसकी अधिकतम गति 28 नॉट है। विक्रांत में करीब 2,200 कंपार्टमेंट हैं, जो इसके चालक दल के करीब 1,600 सदस्यों के लिए हैं, जिनमें महिला अधिकारी और नाविक भी शामिल हैं। विक्रांत ने पिछले साल 21 अगस्त से अब तक समुद्र में परीक्षण के कई चरणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।  

बयान के अनुसार, ‘पोत में लड़ाकू विमान मिग-29के, कामोव-31, एमएच-60आर बहुउद्देशीय हेलीकॉप्टर के साथ ही स्वदेश निर्मित उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) और हल्के लड़ाकू विमान (एलएसी) सहित 30 विमानों को रखने की क्षमता है। 

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पीयूष गोयल के घर जाकर मोदी ने की गणपति पूजा: पीएम पीले कुर्ते-शॉल में आए नजर; मनु सिंघवी, स्वप्न दास गुप्त ... - Dainik Bhaskar

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  • Ganesh Chaturthi| PM Modi Ganesh Puja At Union Minister Piyush Goyal Residence

नई दिल्ली2 घंटे पहले

गणेश चतुर्थी के मौके पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के घर गणपति पूजन में शामिल हुए। उन्होंने आरती भी की। इस दौरान पीएम मोदी हल्के पीले रंग का कुर्ता पहने और कंधे पर शॉल डाले दिखे। इस पूजन में अभिषेक मनु सिंघवी, स्वप्न दास गुप्त भी मौजूद रहे। इस आयोजन का वीडियो PMO ने यूट्यूब पर शेयर किया है।

इससे पहले पीएम मोदी ने दिन में देशवासियों को गणेश चतुर्थी के मौके पर बधाई दी थी। पीएम ने गणपति पूजन की तस्वीर के साथ संस्कृत में श्लोक पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा- ‘गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं। भगवान गणेश का आशीर्वाद सदा आप पर बना रहे।’

राष्ट्रपति ने भी दी शुभकामनाएं
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी गणेश चतुर्थी के मौके पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ट्वीट किया, ‘गणेश चतुर्थी पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। विघ्नहर्ता और मंगलमूर्ति भगवान गणेश ज्ञान, सिद्धि और सौभाग्य के प्रतीक हैं। मेरी कामना है कि श्री गणेश के आशीर्वाद से सभी के जीवन में सुख,शांति और समृद्धि का संचार हो।’

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31 अगस्त से 9 सितंबर तक चलेगा गणेशोत्सव
31 अगस्त को गणेश चतुर्थी के साथ देशभर में 10 दिन का गणेशोत्सव शुरू हो गया है। यह 9 सितंबर तक जारी रहेगा। देशभर में घर, सोसायटी, दुकानों और ऑफिसों में गणपति की मूर्ति स्थापित की गई है, जिन्हें 10वें दिन विसर्जित किया जाएगा।

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राडिया टेप लीक से जुड़ी रतन टाटा की अर्ज़ी पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट - NDTV India

राडिया टेप लीक से जुड़ी रतन टाटा की अर्ज़ी पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली:

नीरा राडिया से जुड़े 2010 में ऑडियो टेप के लीक होने की जांच की मांग करने वाली उद्योगपति रतन टाटा की याचिका पर आठ साल के बाद सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. रतन टाटा ने कहा है कि टेप लीक उनके निजता के अधिकार का उल्लंघन है.

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नीरा राडिया की उद्योगपतियों, पत्रकारों, सरकारी अधिकारियों और प्रमुख पदों पर बैठे अन्य लोगों के साथ फोन पर हुई बातचीत को एक दशक पहले की जांच के हिस्से के रूप में टैप किया गया था.

अगस्त 2012 में रतन टाटा ने सुप्रीम कोर्ट से सरकार द्वारा दाखिल की गई रिपोर्ट की एक प्रति मांगी थी, जिसमें बताया गया था कि कैसे टेप लीक हुई है. इस विवाद को बाद में "राडिया टेप" विवाद के रूप में जाना गया.

नीरा राडिया के साथ रतन टाटा की बातचीत साल 2010 में मीडिया में सामने आई थी. इसके बाद वे सरकार के खिलाफ कोर्ट में पहुंचे और कहा कि टेपों को जारी करना उनके निजता के अधिकार का उल्लंघन है.

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Wednesday, August 31, 2022

Ganesh Chaturthi 2022: इस मराठी परिवार ने 144 साल पहले की थी गणेश महोत्सव की शुरुआत, आज भी निभा रहे परंपरा - Aaj Tak

Ganesh Chaturthi 2022: देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. गणपति को समर्पित ये त्योहार गांव से लेकर छोटे-बड़े सभी शहरों में मनाया जाता है. इस दिन लोग भगवान गणेश की स्थापना करके उनकी पूजा-अर्चना करते हैं. ऐसा कहा जाता है कि गणेश उत्सव की शुरुआत 1892 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने महाराष्ट्र में की थी. उस वक्त देश में आजादी की लड़ाई चल रही थी. ऐसे में तिलक ने गणेश उत्सव के नाम पर लोगों में एकता और राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करने के उद्देश्य से गणेश उत्सव मनाया था.

हालांकि बहुत कम लोग ये बात जानते होंगे कि इससे पहले गुजरात के पाटण शहर में रहने वाले महाराष्ट्र के एक परिवार ने 1878 में पाटण की गणेशवाड़ी में गणेश महोत्सव की शुरुआत की थी. इसके साक्ष्य आज भी मौजूद हैं.

पाटण शहर में रहने वाले इस मराठी परिवार ने 1878 में अपने घर में गणेश जी की स्थापना की थी. उस वक्त उन्होंने वडोदरा से गणेश जी की मिट्टी से बनी प्रतिमा मंगवाई थी. यह परंपरा आज भी कायम है. भगवान गणेश को समर्पित गणेश चतुर्थी का त्योहार हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. महाराष्ट्र में लोग बड़ी ही धूमधाम से ये त्योहार मनाते हैं.

मराठी परिवार के सदस्य सुरेश भाई देशमुख का कहना है, 'हमारे परिवार में पिछले 144 साल से गणेश महोत्सव मनाया जा रहा है. हमारे यहां गणेश मूर्ति की खासियत ये है कि 144 साल पहले जिस मिट्टी से मूर्ति का निर्माण हुआ था, आज भी उसी मिट्टी से प्रतिमा बनाई जाती है. जब भी ये मूर्ति खंडित होती है तो उसे मंत्रोच्चार के साथ उसी मिट्टी के साथ दोबारा बनाया जाता है और भगवान गणेश की विधिवत पूजा की जाती है.

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'हां, ये सही है लेकिन क्या मुल्क में यही चलता रहेगा...', ASI रिपोर्ट पर बोले प्रोफेसर इरफान हबीब - Aaj Tak

ज्ञानवापी परिसर की ASI सर्वे रिपोर्ट को लेकर हिंदू पक्ष ने कई दावे किए हैं. गुरुवार को वकील विष्णु शंकर जैन ने रिपोर्ट सार्वजनिक की. उन्हों...